यूपी के मुरादाबाद जिले में बेहद अजीबोगरीब और चौकानें वाला मामला सामने आया है. दरअसल सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर मोर्चरी में रखने को भेज दिया. व्यक्ति लगभग सात घंटे से अधिक समय के लिए मोर्चरी फ्रीजर में रहा. डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से एक जिंदा व्यक्ति को पूरी रात मोर्चरी में रहना पड़ा.
अस्पताल की लापरवाही का मामला
श्रीकेश कुमार मुरादाबाद में एक इलेक्ट्रीशियन का काम करते हैं. 18 नवंबर की रात उनका एक्सीडेंट हो गया था, जब एक तेज रफ्तार गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी. आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया जहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और बॉडी को फ्रीजर में रखने के लिए कहा ताकि अगले दिन पोस्टमोर्टम किया जा सके. पुलिस ने सुबह पंचनामा भरने के लिए बॉडी फ्रीजर से बाहर निकाली, तो श्रीकेश की साली को उनके शरीर में हरकत दिखाई दी. इसके बाद व्यक्ति को भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया गया. इस दौरान पंचनामा के लिए चौकी इंचार्ज भी पहुंचे थे. उन्हें भी मरीज के जिंदा होने का आभास हुआ. परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया. पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है.
बाइक ने मारी टक्कर
जानकारी के मुताबिक 45 वर्षीय श्रीकेश संभल के हजरत नगर गढ़ी गांव कोटा के रहने वाले हैं. गुरुवार की शाम दूध लेने के लिए वह घर से निकला थे, जब रास्ते में बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी. परिवार के लोग उसे इलाज के लिए दिल्ली रोड स्थित साईं अस्पताल ले गए, जहां से उसे रेफर कर दिया गया. इसके बाद उन्हें मझोला के ब्राइट स्टार अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया गया.
मुरादाबाद के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ शिव सिंह ने कहा, “आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी ने लगभग 3 बजे मरीज को देखा था. उस दौरान उसकी धड़कन नहीं चल रही थी. उसने मुझे बताया कि उसने उस व्यक्ति की कई बार जांच की और तब उसे मृत घोषित किया. सुबह पुलिस टीम और उसके परिवार ने उसे जीवित पाया. जांच के आदेश दे दिए गए हैं और फिलहाल हमारी प्राथमिकता उनकी जान बचाना है."
साली के आवाज देने पर श्रीकेश में आई हरकत
श्रीकेश की साली मधुबाला एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. मधुबाला ने कहा, “पुलिस को पंचनामे के लिए परिवार के चार सदस्य चाहिए थे. मैंने मोर्चरी में अंदर जाने का फैसला किया. जब मैंने उनके गालों को छुआ और उन्हें जीजा जी कहा तो उन्होंने कुछ हरकत की और मैंने देखा कि वह सांस ले रहे थे. मैंने तुरंत पुलिस को इसके बारे में सूचित किया और एक डॉक्टर को बुलाया, जिन्होंने जांच की और उन्हें जीवित पाया.
खतरे से बाहर है श्रीकेश
कुमार के फ्रीजर से जिंदा बाहर आने के बाद उन्हें मेरठ के स्वास्थ्य केंद्र में रेफर कर दिया गया, जहां उनकी हालत में सुधार है. मधु बाला ने कहा, "उन्हें अभी होश नहीं आया है लेकिन डॉक्टरों ने हमें आश्वासन दिया है कि वह खतरे से बाहर हैं." हालांकि परिजन डॉक्टरों से नाराज हैं. मधु बाला ने कहा, "हम उनके खिलाफ लापरवाही के लिए शिकायत दर्ज करेंगे क्योंकि उन्होंने श्रीकेश के जिंदा होने के बावजूद उसे लगभग मार ही डाला था."