25 फीसदी से ज्यादा अग्निवीरों को मिल सकता है परमानेंट होने का मौका, क्यों हो रही इसकी चर्चा?

अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को 4 साल के लिए सर्विस में भर्ती किया जाता है. इसके बाद अग्निवीरों को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज का भुगतान किया जाएगा. अब तक नियम है कि सिर्फ 25 फीसदी अग्निवीरों को स्थाई तौर पर सेना में सेवा का मौका मिलेगा. लेकिन अब इसमें तय सीमा में ही बढ़ोतरी की चर्चा हो रही है.

Agniveers
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

अग्निवीरों के लिए जल्द गुड न्यूज आने वाली है. अग्निपथ योजना के तहत सेना में परमानेंट अग्निवीरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. अभी 25 फीसदी अग्निवीरों को सैन्य सेवाओं में परमानेंट किया जाता है. लेकिन अब अग्निवीरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीटों की संख्या 50 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है.

अग्निवीरों को मिल सकती है गुड न्यूज-
अग्निवीरों का पहला मैच इस साल अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा करने वाला है. इस योजना के तहत जवानों की सिर्फ 4 साल के लिए भर्ती होती थी. लेकिन अब उनकी स्थाई नियुक्ति की चर्चा हो रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय नौसेना 75 फीसदी अग्निवीरों को रिटेन करने का प्रस्ताव रख सकती है. जबकि आर्मी और नेवी मौजूदा 25 फीसदी की सीमा बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मांग कर सकती है. हालांकि इस मामले पर अभी अहम चर्चा होनी बाकी है.

शुरुआत में 25 फीसदी सीमा तय की गई थी-
अग्निपथ योजना की शुरुआत में तय किया गया था कि 4 साल की सेवा के बाद मेरिट के आधार पर जवानों की सेवा जारी रखी जाएगी. सिर्फ 25 फीसदी अग्निवीरों को परमानेंट करने की सीमा तय की गई थी. 4 साल की सर्विस पूरी होने के बाद अग्निवीर सेवा से मुक्त किए जाएंगे. इसके बाद जो अग्निवीर नौकरी करना चाहेंगे, उन्हें मेरिट के आधार पर सलेक्ट करके दोबारा परमानेंट सैनिक के तौर पर भर्ती किया जाएगा.

अग्निवीरों को क्यों रिटेन किया जा सकता है?
पिछले 4 सालों में अग्निवीरों ने कई अहम मोर्चों पर देश के लिए डटे रहे. अग्निवीर आधुनिक हथियारों और नई तकनीक को अच्छी तरह से समझ गए हैं और उसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं. इसलिए अनुभवी जवानों को परमानेंट करने से सेनाएं मजबूत होंगी.

क्या है अग्निपथ योजना?
साल 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत की गई थी. इसके तहत सैन्य सेवाओं में भर्ती युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है. इसके तहत जवानों को 4 साल के लिए सशस्त्र बलों में सेवा के लिए चुना जाता है. इसके साथ ही ये भी तय किया गया था कि 25 फीसदी अग्निवीरों को परमानेंट तौर पर सेना में काम करने का मौका मिलेगा. लेकिन अब इसमें ही बढ़ोतरी को लेकर चर्चा हो रही है.

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