जीते जी कर डाली अपनी तेरहवीं और बरसी,शोक-संदेश का कार्ड भी बांटा फिर लोगों को अपने हाथों से खिलाया मृत्यु भोज

रामलोटन ने बताया कि उन्होंने अपना शरीर मेडिकल कॉलेज सतना को दान करने का संकल्प लिया है. इसलिए मृत्यु के बाद उनका पारंपरिक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

Satna man unique death feast
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

मध्य प्रदेश के सतना जिले के अतरवेदिया गांव में इन दिनों एक अनोखा आयोजन चर्चा का विषय बना हुआ है. गांव के प्रसिद्ध वैद्य और समाजसेवी रामलोटन कुशवाहा ने जीते जी अपनी तेरहवीं और बरसी का आयोजन कर डाला. इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने बाकायदा 'शुभ शोक-संदेश' लिखे निमंत्रण कार्ड छपवाकर रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों में बांटे.

रामलोटन के इस अनोखे फैसले को देखने और समझने के लिए बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में पहुंचे. यहां माहौल शोक का नहीं, बल्कि एक अलग तरह की सामाजिक सोच और आत्मसंतोष का नजर आया.

बोले- मरने के बाद इंसान खुद कुछ देख नहीं पाता
रामलोटन कुशवाहा का कहना है कि आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद तेरहवीं और बरसी पर भोज कराया जाता है, लेकिन उस समय खुद वह व्यक्ति मौजूद नहीं होता.

उन्होंने कहा, 'जब अपने लोगों को सम्मानपूर्वक भोजन कराना ही है, तो यह काम जीते जी क्यों न किया जाए. कम से कम मैं यह तो देख पा रहा हूं कि मेरे अपने लोग खुश होकर भोजन कर रहे हैं.'

मेडिकल कॉलेज को दान करेंगे शरीर
रामलोटन ने बताया कि उन्होंने अपना शरीर मेडिकल कॉलेज सतना को दान करने का संकल्प लिया है. इसलिए मृत्यु के बाद उनका पारंपरिक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. उनका मानना है कि इंसान का शरीर आखिरकार मिट्टी या राख बन जाता है, लेकिन यदि वही शरीर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च के काम आ जाए तो इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि जीवन और मृत्यु दोनों को सहजता से स्वीकार करना चाहिए. इसी भावना के साथ उन्होंने प्रयागराज जाकर अपना पिंडदान भी कर दिया है.

गांव में हुआ सामूहिक मृत्यु भोज
13 मई को आयोजित इस सामूहिक भोज में गांव और समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया. रामलोटन खुद लोगों को भोजन परोसते नजर आए. लोगों का कहना था कि पहली बार किसी व्यक्ति को अपनी ही तेरहवीं और बरसी में इतनी खुशी के साथ शामिल होते देखा गया.

मन की बात में भी हो चुका है जिक्र
रामलोटन कुशवाहा वर्षों से औषधीय पौधों के संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उनके कार्यों का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल 2023 को प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम में भी किया था.

-वेंकटेश द्विवेदी की रिपोर्ट

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