मुंबई की सड़कों पर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए अब स्थानीय भाषा का ज्ञान अनिवार्य शर्त बनता जा रहा है. मुंबई के विभिन्न व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ (RTO) विभाग एक संयुक्त व कड़ा अभियान चलाकर चालकों के मराठी ज्ञान की जांच शुरू कर दी है.
अभियान के तहत अधिकारियों ने चालकों को रोककर सीधे सवाल किए "काय, मराठी येते का?" (क्या आपको मराठी आती है?) और "क्या आपने कहीं से मराठी की ट्रेनिंग ली है?" जिन चालकों को भाषा का बुनियादी ज्ञान नहीं था, उनके वाहन नंबर दर्ज कर उन्हें सीधे कानूनी नोटिस थमा दिए गए.
प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस में साफ निर्देश है कि चालकों के पास मराठी सीखने या औपचारिक प्रशिक्षण लेने के लिए केवल एक महीने का समय है. तय समय सीमा में भाषा न सीखने की स्थिति में संबंधित चालक का ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा.
आरटीओ अधिकारी मनीषा मोरे ने बताया कि सुबह के सत्र में करीब 25 ऑटो और टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किए गए. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी.
इस निरीक्षण के दौरान सड़कों पर मिला-जुला माहौल दिखा. खासकर उत्तर भारत से आए कई चालक अपनी आजीविका बचाने के लिए टूटी-फूटी ही सही, मगर मराठी बोलने की पूरी कोशिश करते नजर आए.
वहीं, कई चालकों ने अपनी व्यावहारिक परेशानी साझा करते हुए कहा कि हमें मराठी समझ आती है और थोड़ी-बहुत बोल भी लेते हैं. लेकिन जब मुंबई की लोकल पब्लिक ही गाड़ी में बैठकर हिंदी में बात करती है, तो हमें भी जवाब हिंदी में ही देना पड़ता है. अगर यात्री हमसे मराठी में बात करेंगे, तो हमारी प्रैक्टिस भी बेहतर होगी.
शिवसेना UBT नेता इंतेखाब फारूकी ने कहा कि हम लोगों को मराठी भाषा का सम्मान करते हुए इसे सीखना और बोलना चाहिए, फारूकी पहले भी लोगों को मराठी बोलने और सीखने के लिए मराठी की किताबें बांटने नजर आए थे.
कार्रवाई के बाद से ड्राइवरों में हड़कंप जरूर है, लेकिन अपनी आजीविका पर आंच न आए, इसलिए कई चालकों ने काम के साथ-साथ बुनियादी मराठी शब्द और वाक्य सीखने की शुरुआत कर दी है.