सहारनपुर में हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत तस्वीर! मुस्लिम कारीगर दिन-रात सिल रहे भोले भक्तों की ड्रेस

सहारनपुर के फैक्ट्री मालिक फरमान अहमद ने बताया कि वह वर्ष 2010 से सिलाई और कांवड़ ड्रेस बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सावन के सीजन में काम इतना बढ़ जाता है कि एक से डेढ़ महीने पहले ही तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं.

Kanwar Outfits
राहुल कुमार
  • सहारनपुर ,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:08 PM IST

सहारनपुर में कांवड़ यात्रा शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है. भगवान भोले के भक्तों के लिए कांवड़ की ड्रेस तैयार करने वाले कारीगरों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दे रही है. शहर एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर रहा है, जहां कांवड़ लेने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुस्लिम कारीगर दिन-रात मेहनत कर विशेष ड्रेस तैयार कर रहे हैं. सावन के मौसम में बाजार भगवा रंग में रंगने लगे हैं और दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है.

2010 से बना रहे कांवड़ ड्रेस
सहारनपुर के फैक्ट्री मालिक फरमान अहमद ने बताया कि वह वर्ष 2010 से सिलाई और कांवड़ ड्रेस बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सावन के सीजन में काम इतना बढ़ जाता है कि एक से डेढ़ महीने पहले ही तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं.

इस बार बाजार में महाकाल और भोलेनाथ की प्रिंट वाली ड्रेस की सबसे ज्यादा मांग है. उन्होंने बताया कि इस बार करीब 50 नए डिजाइन बाजार में आए हैं और उनकी फैक्ट्री में अब तक एक लाख से ज्यादा ड्रेस तैयार की जा चुकी हैं.

भोले भक्त हमारी बनाई ड्रेस पहनते हैं, इससे गर्व होता है
फरमान अहमद का कहना है कि कांवड़ियों के लिए ड्रेस बनाते समय उन्हें बेहद खुशी और गर्व महसूस होता है. उन्होंने बताया कि इतने वर्षों में कभी किसी ने उनसे यह नहीं कहा कि वह मुसलमान होकर यह काम क्यों कर रहे हैं.

उनके मुताबिक सहारनपुर में हिंदू और मुस्लिम हमेशा मिल-जुलकर त्योहार मनाते आए हैं और यही शहर की सबसे बड़ी पहचान है. उन्होंने कहा कि जब भोले भक्त उनकी बनाई हुई ड्रेस पहनकर जल लेने जाते हैं तो उन्हें दिल से खुशी होती है और यह भाईचारे की एक खूबसूरत मिसाल है.

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