नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के कई गांवों में जिस पानी को लोग रोजमर्रा की जिंदगी का आधार मानते हैं, वही अब बीमारी की वजह बन गया है. दूषित पेयजल के कारण इलाके में स्वास्थ्य संकट गहरा गया है. पीलिया, डायरिया और लिवर संक्रमण जैसी बीमारियों की चपेट में आने से एक महिला और एक युवक समेत दो लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है. वहीं, सैकड़ों ग्रामीणों के बीमार होने की बात सामने आ रही है.
कई गांवों में लोग बीमारी से परेशान
दूषित पानी का असर ज्योलीकोट के साथ आसपास के कई गांवों में भी देखने को मिल रहा है. वीरभट्टी, गांजा, छिंडां मल्ला, बगरीखोड़ और छिंडां तल्ला समेत कई जगहों पर ग्रामीण उल्टी, दस्त, बुखार और पीलिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं. लगातार लोगों के बीमार पड़ने और दो लोगों की मौत के बाद अब ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है. स्वास्थ्य संकट के बीच इलाके में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पानी की जांच में सामने आया सीवरेज का मिश्रण
मामले में सबसे गंभीर बात पेयजल की जांच के बाद सामने आई. जांच में पानी में सीवरेज के मिश्रण की पुष्टि हुई है. इसके बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने जिस जल स्रोत को संदिग्ध माना, उसे सील कर दिया गया. पानी में सीवरेज मिलने की पुष्टि के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पेयजल लाइन तक सीवरेज पहुंचा कैसे और इसकी वजह क्या रही. दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. स्थानीय निवासी और ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख हिमांशु पांडे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए हैं. ग्रामीणों की मांग है कि दूषित पानी की सप्लाई के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए. इसके साथ ही जिम्मेदारी तय करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का किया मुआयना
इसी बीच आज प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया. मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल रश्मि पंत, तहसीलदार, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आशीष पिल्लई, जल निगम के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र में पेयजल और सीवरेज लाइनों की स्थिति का जायजा लिया. इसके साथ ही जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई है.
अब उठ रहे हैं कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल
पानी में सीवरेज मिलने की पुष्टि और दो लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने कई सवाल हैं. अगर पेयजल में सीवरेज मिल रहा था तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हो सकी? ग्रामीणों के लगातार बीमार पड़ने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? ये सवाल इसलिए भी अहम हैं क्योंकि दूषित पानी की वजह से कई गांवों के लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है.
साफ पानी के साथ जवाबदेही चाहते हैं ग्रामीण
फिलहाल ग्रामीणों की मांग सिर्फ साफ और सुरक्षित पेयजल तक सीमित नहीं है. दो लोगों की मौत के बाद वे इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. जिस पानी को जीवन का आधार माना जाता है, आखिर वही पानी बीमारी और मौत की वजह कैसे बन गया, अब इस सवाल का जवाब प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा.
ये भी पढ़ें