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Ayodhya: विदेशों में मंदिरों को निशाना बनाने वाले खालिस्तानियों की आंखें खोलने के लिए निहंग सिखों की अनूठी पहल, अयोध्या में हिंदू श्रद्धालुओं के लिए लगाएंगे शिविर और लंगर

बाबा फकीर सिंह खालसा की आठवीं पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले बाबा रसूलपुरी ने कहा कि जो लोग विदेशों में बैठकर हिंदू-सिख भाईचारे को तोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं उनके मंसूबे कभी भी कामयाब नहीं होंगे. सभी धर्मों की इज्जत करना गुरु नानक देव जी की पहली शिक्षा है.

बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर
मनजीत सहगल
  • चंडीगढ़,
  • 17 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST
  • हिंदू-सिख भाईचारे की कायम करेंगे मिसाल 
  • निहंग सिखों ने किया था बाबरी ढांचे पर हवन-यज्ञ 

निहंग सिख ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने वाले खालिस्तानियों की आंखें खोलने के लिए एक अनूठी पहल करने जा रहे हैं. जी हां, निहंग सिख बाबा हरजीत सिंह रसूलपुरी ने 22 जनवरी से अयोध्या में भगवान राम लाल की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के लिए विशेष लंगर और शिविर लगाने की घोषणा की है.

बाबरी मस्जिद की दीवारों पर लिखा था भगवान राम का नाम
हरजीत सिंह रसूलपुरी बाबा फकीर सिंह खालसा की आठवीं पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं, जिन्होंने 30 नवंबर 1858 को अपने 25 साथियों सहित विवादित बाबरी मस्जिद परिसर में कब्जा करने के बाद वहां न केवल हवन यज्ञ किया था बल्कि दीवारों पर भगवान राम का नाम तक लिख दिया था. इसके उपरांत उनके खिलाफ बाबरी मस्जिद के मुअज्जिम (मस्जिद अधिकारी) की शिकायत पर अवध के थानेदार ने 30 नवंबर 1858 को 25 निहंग सिंहों (सिखों) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. 

निहंग सिखों पर दर्ज की गई FIR का है उल्लेख
राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी के पेज नंबर 164 पर अयोध्या में निहंग सिखों पर दर्ज की गई एक FIR का उल्लेख है. जब दो दर्जन निहंग सिखों ने बाबा फकीर सिंह खालसा के नेतृत्व में 30 नवंबर 1858 को बाबरी मस्जिद ढांचे पर कब्जा कर लिया था. फकीर सिंह के वंशजों की आठवीं पीढ़ी के संत बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर अब 22 जनवरी 2023 को भगवान राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर वहां पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए एक शिविर आयोजित कर रहे हैं.

सिख और सनातन धर्म में है गहरा रिश्ता 
निहंग सिखों की यह पहल उन दर्जन भर खालिस्तानियों के मुंह पर कड़ा तमाचा है, जो हिंदू-सिख भाईचारे में दरार डालने की नाकाम कोशिश में लगे हुए हैं और विदेशों में हिंदू मंदिरों को निशाना बना रहे हैं. निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुरी ने कहा कि सिख धर्म और सनातन धर्म में गहरा रिश्ता है और सिख हमेशा हिंदू धर्म की रक्षा करके हिंदू-सिख भाईचारे की मिसाल कायम करते आए हैं.

सभी धर्म की इज्जत करना गुरु नानक देव जी की पहली शिक्षा
बाबा रसूलपुरी ने कहा कि जो लोग विदेशों में बैठकर हिंदू-सिख भाईचारे को तोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं उनके मंसूबे कभी भी कामयाब नहीं होंगे क्योंकि सिख धर्म के रक्षक हैं और सभी धर्म की इज्जत करना गुरु नानक देव जी की पहली शिक्षा है. बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने कहा कि न सिर्फ उनके पूर्वजों की भी भगवान राम के प्रति सच्ची श्रद्धा व आस्था रही है बल्कि उनकी भी उतनी ही है और इसी कारण उन्होंने कहा कि अब जब 22 जनवरी 2024 को श्री राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही तो वे पीछे कैसे रह सकते हैं इसलिए उन्होंने निर्णय किया वे अपने निहंग सिंहों के साथ अयोध्या में लंगर लगा देश-विदेश से आने वाली संगत की सेवा करेंगे.

जब भी देश व धर्म को जरूरत पड़ेगी पीछे नहीं हटेंगे
बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने कहा कि निहंग सिंह के नाते जितना सिख धर्म के प्रति वे स्वयं आस्थावना है उतनी ही श्रद्धा उनकी सनातन धर्म में भी है. आज सिख धर्म को हिन्दू धर्म से अलग करके देखने वाले कट्टरपंथियों को जानना चाहिए कि राम मंदिर के लिए पहली एफआईआर हिन्दुओं के विरुद्ध नहीं बल्कि सिखों के खिलाफ हुई थी. उन्होंने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल के साथ संबंध नहीं है. वह केवल सनातन परंपराओं के वाहक हैं. निहंगों तथा सनातन विचारधारा के बीच तालमेल बिठाते समय उन्हें कई बार आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है क्योंकि एक तरफ उन्होंने अमृतपान किया हुआ है तो दूसरी तरफ गले में रूद्राक्ष की माला भी पहनी हुई है. जत्थेदार बाबा हरजीत सिंह ने कहा कि जब भी देश व धर्म को जरूरत पड़ेगी तो वह तथा उनका परिवार कभी पीछे नहीं हटेंगे.

 

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