ना खेतों में उगता, ना खाने में परोसा जाता… भारत के इस शहर में पूरी तरह बैन है प्याज, हैरान कर देगी वजह

क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जहां न तो प्याज और लहसुन उगता है, न बिकता है और न ही किसी खाने में परोसा जाता है. मतलब इस शहर में प्याज और लहसुन पूरी तरह से बैन है. क्या आप जानते हैं भारत के इस शहर का नाम? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं इस शहर का नाम.

इस शहर में लहसुन-प्याज है बैन
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:41 PM IST

भारत में प्याज और लहसुन सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि खाने की जान माना जाता है. प्याज एक ऐसी सब्जी है, जिसका इस्तेमाल ज्यादातर खानों में किया जाता है. दाल, सब्जी, चटनी से लेकर पराठे और सेहत के कई चीजों में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जहां न तो प्याज और लहसुन उगता है, न बिकता है और न ही किसी खाने में परोसा जाता है. मतलब इस शहर में प्याज और लहसुन पूरी तरह से बैन है. क्या आप जानते हैं भारत के इस शहर का नाम? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं इस शहर का नाम.

हम बात कर रहे हैं, जम्मू-कश्मीर के कटरा शहर के बारे में. कटरा शहर ऐसा इकलौता शहर है, जहां प्याज और लहसुन पर पूरी तरह प्रतिबंध है. जी हां, ये वही शहर है जहां से माता वैष्णो देवी की यात्रा की शुरुआत होती है. यहां न तो प्याज और लहसुन उगता है, न बिकता है और न ही किसी खाने में परोसा जाता है. मतलब इस शहर में प्याज और लहसुन पूरी तरह से बैन है. लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर यहां ऐसी परंपरा क्यों है? चलिए आपको बताते हैं.

क्यों है लहसुन-प्याज बैन?
दरअसल, कटरा से ही माता वैष्णो देवी की यात्रा की शुरुआत होती है. लाखों श्रद्धालुओं के लिए कटरा एक धार्मिक केंद्र है. हिंदू धर्म में प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है. यहां की पवित्रता और धार्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए सरकार ने यहां पर प्याज और लहसुन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है. यही कारण है कि, कटरा कटरा शहर में स्थित किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में प्याज-लहसुन से बनी हुई डिश आपको सर्व नहीं की जाएगी. न तो किसी सब्जी वाले के पास प्याज और लहसुन मिलेगा. इसके बाद भी यहां का भोजन बेहद स्वादिष्ट होता है. श्रद्धालुओं को सात्विक और पौष्टिक खाना परोसा जाता है, जो स्वाद और आस्था दोनों को संतुलित रखता है. श्रद्धालु भी इस नियम को सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं और इसे यात्रा का हिस्सा मानते हैं.

स्थानीय लोगों की खास भूमिका
खास बात है कि, इस परंपरा को निभाने में स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां नियमों का सख्ती से पालन होता है और स्थानीय लोग इसे आस्था का हिस्सा मानकर अपनाते हैं. यह शहर सिर्फ माता वैष्णो देवी का प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि आस्था और अनुशासन का प्रतीक भी है.

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