Public Examinations Prevention of Unfair Means Amendment Bill 2026 देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार अब परीक्षा प्रणाली को और सख्त बनाने की तैयारी में है. इसी दिशा में परीक्षा पेपर लीक संशोधन विधेयक-2026 लाया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा मजबूत करना है. सरकार का कहना है कि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कार्रवाई होगी. इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर सख्त सजा और आर्थिक दंड तक का प्रावधान किया गया है.
संशोधन बिल का नाम- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026
यह है प्रस्ताव?
केंद्र सरकार 2024 में लागू हुए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन विधेयक ला रही है. नए प्रस्ताव के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव रखेगी, जिसमें दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी. इसका उद्देश्य परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है. इस प्रणाली के उद्देश्य है कि 3 महीने के अंदर पेपर लीक मामले पर चार्जशीट दाखिल करके ट्रायल पूरा किया जाए.
कितनी कड़ी सजा का प्रावधान?
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए पहले से अधिक सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. गंभीर मामलों में 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही जुर्माने की राशि भी 50 लाख रुपए कर बढ़ाई जाएगी. यदि किसी संगठित गिरोह, परीक्षा केंद्र, एजेंसी या संस्थान की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे धांधली करने वालों को न्यूनतम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान लागू किया जाएगा.
अभी पेपर लीक को लेकर क्या है प्रावधान?
2024 में लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक पर रोक लगाना था. मौजूदा कानून में भी पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना गया है. साथ ही दोषियों के खिलाफ 5 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपए तक की आर्थिक दंड का प्रावधान पहले से मौजूद है. अब सरकार इसी कानून को और अधिक मजबूत बनाने के लिए संशोधन ला रही है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट करेगी हर दिन मामले की जांच
संशोधन विधेयक के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके. साथ ही जांच एजेंसियों के लिए भी समय-सीमा तय करने का प्रस्ताव है, जिससे जांच और चार्जशीट की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो. सरकार का मानना है कि इससे परीक्षा से जुड़े अपराधों पर तेजी से कार्रवाई होगी और छात्रों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था पर और मजबूत होगा.
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