संसद का मानसून सत्र अभी भी जारी है. हालांकि पिछले 41 दिनों से संसद की कोई बैठक नहीं हुई है. 13 अगस्त को मानसून सत्र की आखिरी बैठक हुई थी. उसके बाद से ही सत्र साइन डाई है. इसका मतलब होता है कि बिना किसी तारीख के अनिश्चित काल के लिए. इसका मतलब है कि मानसून सत्र अभी भी जारी है. इस सत्र सत्रावसान नहीं हुआ है. सत्र के साइन डाई होने से कई कयास लगाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस सत्र को लेकर सरकार कुछ सोच बड़ा रही है. हालांकि सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई जानकारी नहीं आई है.
सबसे लंबे अंतराल का रिकॉर्ड-
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बार इतिहास का सबसे लंबा साइन डाई है. इससे पहले साइन डाई कुछ दिनों के लिए होता था. उसके बाद सत्रावसान कर दिया जाता था. इससे पहले साल 2015 के मानसून सत्र में 28 दिनों तक संसद का सत्रावसान नहीं हुआ था. जबकि साल 1975 में 5वीं लोकसभा में संसद की अंतिम बैठक और सत्रावसान के बीच का अंतराल 27 दिन का था. लेकिन इस बार मानसून सत्र में ये समय 41 दिन का हो चुका है. अभी भी सत्रावसान को लेकर कोई जानकारी नहीं है.
कब कितने दिन का रहा साइन डाई-
साल 1993 में 26 दिन के लिए साइन डाई रहा था. उसके बाद सत्रावसान हो गया था. जबकि साल 1988 में 25 दिन और 20 दिन का साइन डाई था. इससे पहले साल 1979 में 16 दिन और साल 1984 में 15 दिनों का साइन डाई था. लेकिन अब तक 5 हफ्ते से ज्यादा का साइन डाई कभी नहीं रहा है.
इतना लंबा Sine Die क्यों?
मौजूदा मानसून सत्र इतना लंबा साइन डाई होने को लेकर कई तरह से कयास लगाए जा रहे हैं. इसका मतलब है कि सत्र कभी भी बुलाया जा सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार कोई अहम बिल पास कराने के लिए सत्र बुला सकती है. अगर इस सत्र का सत्रावसान हो जाता है तो परंपरा है कि नया सत्र बुलाने के लिए कम से कम 3 हफ्ते का नोटिस सांसदों को देना पड़ता है. इससे उस कयास को और भी बल मिलता है कि सरकार सत्र बुलाकर कुछ बड़ा कर सकती है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल ला सकती है.
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