Advertisement

जीवन में 280 बार लड़ा चुनाव, नगर निकाय से लेकर राष्ट्रपति के सामने हुए खड़े... जानें कौन थे 'धरती पकड़'

बिहार के भागलपुर के 'धरती पकड़' ने अपने जीवनकाल में 280 बार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई, लेकिन 97 वर्ष की आयु में उनका देहांत हुआ. लेकिन उनका मकसद कभी चुनावी जीत था नहीं, तो फिर क्यों उतरते थे रण में?

नागरमल बाजोरिया उर्फ 'धरती पकड़'
राजीव सिद्धार्थ
  • भागलपुर,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST

लोग अपने जीवन में बहुत ज्यादा बार चुनाव नहीं लड़ते, लेकिन भागलपुर के 'धरती पकड़' उपनाम वाले नागरमल बाजोरिया, अपने जीवन में 280 बार चुनावी रण में उतरे. सन 1930 में लाहौर शहर में जन्मे बाजोरिया परिवार को आजादी से पहले भागलपुर के एमपी द्विवेदी रोड किनारे अपना आशियाना बना कर बस गए. लेकिन सितंबर 2026 में 97 वर्ष की आयु पूरी होने पर उनका स्वर्गवास हो गया. 

चुनाव में जीत नहीं होता था मकसद

नागरमल बाजोरिया जैसे कारोबारी इंसान ने नगर निगम से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक 280 से अधिक बार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई थी. नागरमल बाजोरिया उर्फ 'धरती पकड़' की कहानी सिर्फ चुनाव लड़ने की कहानी नहीं है. 

उनके पोते सौरव बाजोरिया ने बताया कि दादा जी चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि वोटरों की आंखें खोलने के लिए लड़ता थे. हर चुनाव में हार जाना असफलता नहीं था. असल बात थी कि एक आम आदमी भी सत्ता के सबसे बड़े चुनाव में खड़ा हो सकता है, यह भी बताना था. उन्होंने करीब 30 साल की उम्र में भागलपुर नगरपालिका का चुनाव जीता भी था.

रैली में करते थे गधों को इस्तेमाल

उन्होंने 1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी के खिलाफ नामांकन पत्र भरा था. साथ ही आखिरी चुनाव 2019 तक लड़ते रहे. 2005 की एक दिलचस्प वाक्या है कि जब चुनावी समर में थे तो उनके पोशाक और उनके कपड़ों पर लिखा स्लोगन आम जनता को आकर्षित कर रहा था. भ्रष्टाचार पर लिखे स्लोगन के साथ जब रैली निकाले तो उसमें गधों का इस्तेमाल किया था. भ्रष्टाचार से जुड़े स्लोगन की तख्ती गधे के गले में टंगी होती थी. 

जब-जब नागरमल बाजोरिया चुनावी मैदान में होते थे, उनके हाथों की कलाई पर गांधी जी के जमाने की घड़ी होती थी और हाथ में घड़ी घंट होता था. रैली के दौरान घंटी बजाते हुए आम लोगों को लोकतांत्रिक मूल्यों का समझाने और जगाने का प्रयास भी करते थे.

समाजसेवा भी उनके जीवन की अनमोल कड़ी रही. गरीब परिवार के बेटियों की शादी में भरपूर मदद भी करते थे. पेय जल की किल्लत पर कई इलाकों में खुद के खर्चे से हैण्डपम्प भी लगवाया था.

चुनाव लड़ना था एक जुनून

उनके जीवनकाल का दिलचस्प पहलू यही रहा कि नगर निकाय के चुनाव से लेकर तमाम चुनावों में अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करना था. वह अपने जीवनकाल में 280 बार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा चुके थे. यह उनके लिए एक जुनून जैसा था. 

खड़े हुए दिग्गजों के सामने

इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से, राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से, संजय गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और प्रणव मुखर्जी के खिलाफ भी चुनावी मैदान में नागरमल बाजोरिया ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था. जन्म स्थली लाहौर तो था लेकिन कर्मस्थली भागलपुर रहा.

जन्म लाहौर, अब पाकिस्तान में हुआ, लेकिन अंतिम सांस की कड़ी बिहार की राजधानी पटना में टूटी. अब अंतिम संस्कार उनकी कर्मस्थली भागलपुर में गंगा नदी किनारे बरारी के शमशान घाट में होगा.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement