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सोना ना खरीदने, तेल कम खर्च करें... PM मोदी ने लोगों से ये-ये अपील की, जानें क्या है इसका मतलब?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से कुछ अपील की. इस अपील में उन्होंने 1 साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने की हिदायत दी है. जानें उन्होंने ऐसा क्यों कहा और क्या है इसके पीछे का मकसद.

PM Modi
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:10 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कुछ ऐसी अपील की है, जिस पर अब चर्चा तेज हो गई है. उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, सोना खरीदने से बचने और विदेश यात्रा टालने जैसी बातें कही हैं. पहली नजर में ये बातें भले आम लगें, लेकिन इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई से जुड़ी बड़ी वजह बताई जा रही है.

पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश एक संवेदनशील वैश्विक दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में अगर लोग थोड़ी सावधानी बरतें, तो देश आर्थिक दबाव से बेहतर तरीके से लड़ सकता है. उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते हैं, तो उसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है.

पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने की अपील-
पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि पेट्रोल और डीजल का जरूरत भर ही इस्तेमाल करें. उन्होंने सुझाव दिया कि लोग छोटी दूरी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाएं, कार पूलिंग करें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें.

इसके पीछे वजह यह बताई गई कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का विदेशों से खरीदता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी रिजर्व मुद्रा रिजर्व पर और आम लोगों की जेब दोनों पर पड़ता है. ऐसे में तेल की खपत कम करना एक तरह से आर्थिक दबाव कम करने जैसा माना जा रहा है.

सोना खरीदने से बचने की सलाह-
प्रधानमंत्री ने लोगों से जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है.

विदेश यात्रा टालने की अपील-
पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में अगर बहुत जरूरी न हो, तो विदेश यात्रा से बचना चाहिए. उनका कहना था कि विदेश यात्रा में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है, जिससे देश के संसाधनों पर असर पड़ता है.

उन्होंने लोगों से अपील की कि देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर खर्च करें और जहां संभव हो, घरेलू विकल्पों को प्राथमिकता दें.

खाने की बर्बादी रोकने पर भी दिया जोर-
प्रधानमंत्री ने खाने की बर्बादी को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि हमारे यहां काफी मात्रा में खाना बर्बाद हो जाता है, जबकि जरूरतमंद लोग भोजन के लिए संघर्ष करते हैं. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जितनी जरूरत हो, उतना ही खाना लें और भोजन की बर्बादी रोकें.


पीएम मोदी ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील इसलिए की, क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से मंगाता है और इसके लिए डॉलर जैसी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं, सरकार विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर दे रही है. पीएम मोदी का कहना है कि अगर लोग कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम कर दें, तो देश का पैसा बाहर कम जाएगा और उस बचत का इस्तेमाल जरूरी चीजों में किया जा सकेगा.

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इम्पोर्ट करने वाले देशों में गिना जाता है. शादी-ब्याह और त्योहारों में सोने की खरीद काफी ज्यादा होती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है. पीएम मोदी ने इसी वजह से लोगों से अपील की कि फिलहाल जरूरत न हो तो सोना खरीदने को टाल दें. उनका मानना है कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकता है और मुश्किल वैश्विक हालात में आर्थिक बोझ कम कर सकता है.

विदेशी मुद्रा बचाना क्यों जरूरी है?
विदेशी मुद्रा यानी डॉलर, यूरो जैसी करेंसी देश के लिए एक तरह की आर्थिक ताकत मानी जाती है. भारत कच्चा तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई जरूरी चीजें विदेशों से खरीदता है, जिनका भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है. अगर हमारे पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा रहेगी, तो संकट के समय भी जरूरी सामान खरीदने में परेशानी नहीं होगी.

युद्ध, तेल संकट या वैश्विक तनाव के समय विदेशी मुद्रा भंडार और भी अहम हो जाता है. अगर तेल महंगा हो जाए या आयात का खर्च अचानक बढ़ जाए, तो यही भंडार देश को आर्थिक झटके से बचाने का काम करता है. साथ ही, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होने से रुपये पर दबाव कम पड़ता है और दुनिया में यह संदेश जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. यही वजह है कि सरकार इस समय विदेशी मुद्रा बचाने को जरूरी बता रही है. 
 

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