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इलाहाबाद HC ने हत्या के दोषी को दी जमानत, कहा- चुनाव लड़ना आजीविका जैसा अधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी अदालत से हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले नंदलाल राय उर्फ बबूल राय की सजा निलंबति कर दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनेताओं का मतदाताओं के प्रति कर्तव्य होता है और दोषसिद्धि पर रोक न मिलने से वे चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित हो सकते हैं.

Allahabad HC.
आनंद राज
  • प्रयागराज,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी है. कोर्ट ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की सजा निलंबित की है और उसे जमानत दे दी है. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने यह आदेश इसलिए दिया, ताकि अपीलकर्ता 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनेताओं का मतदाताओं के प्रति कर्तव्य होता है और दोषसिद्धि पर रोक न मिलने से वे चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित हो सकते हैं.

दोषी नंदलाल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक स्वतंत्र उम्मीदवार या बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है. नंदलाल राय को कोर्ट ने अप्रैल 2025 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. 

अपीलकर्ता ने गवाही पर उठाए सवाल-
अपीलकर्ता के वकील की तरफ से तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. वकील ने जांच में उनके नाम के देर से खुलासा होने, संदिग्ध प्रत्यक्षदर्शी गवाही और हत्या के हथियार की संदिग्ध बरामदगी की ओर भी इशारा किया.

प्रमोद निगम की हत्या का दोषी है नंदलाल राय-
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन के सक्रिय सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में राय भी शामिल थे. मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि राय का संबंध गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी से था. हालांकि, अपीलकर्ता के वकील ने बताया कि वह अपनी सजा से पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे और 2027 के चुनाव "स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में या यदि संभव हो तो भाजपा से" चुनाव लड़ना चाहते हैं.

कोर्ट ने की टिप्पणी-
न्यायालय ने कहा कि आम आदमी के आजीविका के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, जो किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है, अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी अपील में अंतिम निर्णय सुनने तक जीवित रह सके.

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