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Property Buying Tips: जमीन खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 7 कागज, वरना फंस सकता है पैसा और...

जमीन खरीदते समय सबसे जरूरी बात यही है कि सिर्फ बेचने वाले की बात पर भरोसा न करें, बल्कि हर जानकारी को रिकॉर्ड से सत्यापित करने के बाद ही आगे बढ़ें.

Property Buying Tips
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

जमीन खरीदना हर किसी के लिए बड़ा और महंगा फैसला होता है. लोग अपनी सालों की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट, मकान या खेत के लिए जमीन खरीदते हैं. लेकिन सिर्फ जमीन पसंद आ जाने और बेचने वाले की बात पर भरोसा करके पैसा देना भारी पड़ सकता है. कई बार जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम होती है, उस पर बैंक का कर्ज या बंधक होता है या फिर जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा होता है. ऐसे में खरीदारी से पहले जमीन के दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं वे 7 जरूरी कागज, जिन्हें जमीन खरीदने से पहले जरूर देखना चाहिए.

सेल डीड यानी रजिस्ट्री
सबसे पहले जमीन की सेल डीड यानी रजिस्ट्री जरूर देखें. इससे पता चलता है कि जमीन का मालिक कौन है और उसे जमीन बेचने का अधिकार है या नहीं. रजिस्ट्री में खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल और मालिक की जानकारी होती है. इन सभी जानकारियों को सरकारी रिकॉर्ड से भी मिलाना चाहिए.

मदर डीड से जानें जमीन का इतिहास
मदर डीड जमीन के पुराने मालिकाना हक की जानकारी देती है. इससे पता चलता है कि जमीन पहले किसके नाम थी और मौजूदा मालिक तक कैसे पहुंची. जमीन खरीदने वाले के लिए यह जानना जरूरी है कि बेचने वाले को मालिकाना हक आखिर मिला कैसे.

इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट जरूर चेक करें
इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट यानी EC से जमीन पर दर्ज कर्ज, बंधक या दूसरे कानूनी लेन-देन की जानकारी मिल सकती है. अगर जमीन बैंक के पास गिरवी है और खरीदार ने बिना जांच के उसे खरीद लिया, तो बाद में बड़ी परेशानी हो सकती है.

खसरा-खतौनी या जमाबंदी रिकॉर्ड देखें
खसरा-खतौनी, जमाबंदी या भूमि रिकॉर्ड में जमीन के मालिक, खसरा नंबर और क्षेत्रफल जैसी जानकारी मिलती है. इसे जमीन के बाकी दस्तावेजों से मिलाना जरूरी है. खासतौर पर यह देखें कि बेचने वाला जितनी जमीन बता रहा है, रिकॉर्ड में भी उतनी ही जमीन दर्ज है या नहीं.

म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज की जांच
म्यूटेशन को कई जगह दाखिल-खारिज कहा जाता है. जमीन के मालिकाना हक में बदलाव होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड में इसकी एंट्री होती है. इसलिए यह देखना जरूरी है कि जमीन बेचने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज है या नहीं.

नक्शा और जमीन की सीमाएं मिलाएं
जमीन का नक्शा और उसकी चारों तरफ की सीमाएं भी जरूर जांचें. कागजों में क्षेत्रफल कुछ और और मौके पर जमीन कुछ और निकली, तो विवाद हो सकता है. प्लॉट खरीदते समय रास्ता कहां से है और उसका रिकॉर्ड में उल्लेख है या नहीं, यह भी देखना चाहिए.

जमीन पर कोई केस या विवाद तो नहीं
जमीन खरीदने से पहले यह पता करें कि उस पर कोई कोर्ट केस, पारिवारिक विवाद, अधिग्रहण या दूसरी कानूनी समस्या तो नहीं है. खासकर ऐसी जमीन में सावधानी जरूरी है, जिसके कई मालिक हों या जो विरासत में मिली हो.

सिर्फ कागज देखकर तुरंत पैसा न दें
इन दस्तावेजों की जांच के बाद भी जल्दबाजी में पूरी रकम न दें. सभी कागजों में मालिक का नाम, खसरा नंबर, क्षेत्रफल और जमीन की सीमाएं आपस में मिलाएं.

अगर कोई जानकारी संदिग्ध लगे, तो स्थानीय वकील या प्रॉपर्टी विशेषज्ञ से दस्तावेजों की जांच कराना बेहतर है.

जमीन खरीदते समय सबसे जरूरी बात यही है कि सिर्फ बेचने वाले की बात पर भरोसा न करें, बल्कि हर जानकारी को रिकॉर्ड से सत्यापित करने के बाद ही आगे बढ़ें.

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