Punjab: प्रस्तावित भारत‑अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के लिए खतरा.. क्यों पीएम बिना राज्यों की सलाह के लेते फैसले.. क्या अब भारत का रिमोट व्हाइट हाउस से चलेगा?

भारत के कृषि बाज़ार को अमेरिका के लिए खोलकर मोदी सरकार देश को विदेशी ताकतों के रहमो-करम पर छोड़ने का लाइसेंस दे रही है : भगवंत सिंह मान

Punjab CM Bhagwant Mann
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रस्तावित भारत‑अमेरिका व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र के लिए तीन विवादित कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है, जिनके कारण ऐतिहासिक किसान आंदोलन शुरू हुआ था. 

पंजाब विधानसभा में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत का बाज़ार खोलना पंजाब सहित पूरे देश के किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो भारतीय किसानों को अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ेगा.

भारत-अमेरिका डील कृषि क्षेत्र के लिए खतरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा है, इससे देश का कृषि क्षेत्र विदेशी शक्तियों के प्रभाव में आ सकता है. उन्होंने कहा कि इस समझौते के संभावित नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से इसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है.

सदन को संबोधित करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह समझौता केंद्र सरकार द्वारा पहले लाए गए तीन कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक हो सकता है. उन्होंने कहा कि पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में प्रवेश करके देश को आर्थिक रूप से लूटा था और अब ऐसा प्रतीत होता है कि एक तरह की 'वेस्ट इंडिया कंपनी' भारत की कृषि व्यवस्था में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है.

'केंद्र सरकार का रिमोट विदेशी ताकतों के हाथ में..'
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस प्रस्तावित समझौते के बारे में संबंधित राज्यों से न तो सलाह की गई और न ही उन्हें इस बारे में कुछ बताया गया. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते को लेकर अब तक किसी भी राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया है और न ही किसी को इसकी जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि पता नहीं इस मामले में प्रधानमंत्री जी की क्या मजबूरी है. उन्होंने कहा कि इससे सभी को यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि क्या भारत के फैसले अब व्हाइट हाउस के हस्तक्षेप से लिए जा रहे हैं और क्या केंद्र सरकार का रिमोट विदेशी ताकतों के हाथों में है.

भारत के किसानों के लिए कंपिटीशन कठिन
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कृषि संरचना भारत की तुलना में काफी अलग है. अमेरिका की कृषि विशाल खेतों, उच्च सब्सिडी और पैमाने की अर्थव्यवस्था पर आधारित है, जो उत्पादकों को कम कीमतों पर भी निर्यात करने में सक्षम बनाती है. ऐसी स्थिति में पंजाब के किसानों के लिए अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करना बेहद कठिन हो जाएगा.

उन्होंने बताया कि अमेरिका से पशुओं के चारे के लिए सोया फीड कथित तौर पर बड़ी मात्रा में आयात किया जाएगा. पंजाब लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती करता है और इस समझौते से मक्का तथा सोयाबीन दोनों फसलों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसी तरह अमेरिका से कपास का आयात पंजाब के किसानों को बहुत प्रभावित कर सकता है, जहां लगभग 2.5 लाख एकड़ में कपास की खेती होती है.

पीएम सुने देश की आवाज़
प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की, "प्रधानमंत्री अक्सर ऐसे देशों का दौरा करते हैं जिनके नाम बहुत से लोगों ने कभी सुने भी नहीं होते. ये दौरे लगभग 10,000 की आबादी वाले छोटे देशों में आयोजित शो जैसे लगते हैं. ऐसे देशों में घूमने के बजाय उन्हें भारत के 1.25 अरब लोगों की आवाज़ सुनने पर ध्यान देना चाहिए."

 

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