Rabindranath Tagore Jayanti 2026: 8 साल की उम्र से लिखना शुरू कर दिया था कविता, बापू को दिया था महात्मा का नाम, अंग्रेजों को लौटा दिया था नाइट हुड का सम्मान, जानें गुरुदेव के जीवन से जुड़ी कहानी

Happy Birthday Rabindranath Tagore: आज पूरे देश में रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है. रविंद्रनाथ टैगोर महान कवि के साथ, लेखक, चित्रकार, संगीतकार, दार्शनिक और लघु कथाकार भी थे. उन्होंने सिर्फ 8 साल की उम्र से कविता लिखना शुरू कर दिया था. टैगोर दुनिया के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी रचनाएं तीन देशों का राष्ट्रगान बनीं. रवींद्रनाथ टैगोर ने ही राष्ट्रपिता बापू को महात्मा का नाम दिया था. आइए गुरुदेव के जीवन से जुड़ी कुछ कहानियों के बारे में जानते हैं.

Rabindranath Tagore Jayanti 2026
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

Rabindranath Tagore Birth Story: कविगुरु रविंद्रनाथ टैगोर बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उन्होंने सिर्फ 8 साल की उम्र से कविता लिखना शुरू कर दिया था. रविंद्रनाथ टैगोर महान कवि के साथ, लेखक, चित्रकार, संगीतकार, दार्शनिक, आयुर्वेद शोधकर्ता और लघु कथाकार भी थे.

टैगोर दुनिया के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी रचनाएं तीन देशों का राष्ट्रगान बनीं. रविंद्रनाथ टैगोर भारत के राष्ट्रगान जन गण मन और बांग्लादेश के राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला के रचयिता हैं. उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रगान श्रीलंका मठ की भी रचना की थी. टैगोर को महान रचना गीतांजलि के लिए 1913 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार मिला था. टैगोर दूसरे व्यक्ति थे, जिन्होंने विश्व धर्म संसद को दो बार संबोधित किया था. रवींद्रनाथ टैगोर ने ही बापू को महात्मा का नाम दिया था. 

कोलकाता में हुआ था रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म 
रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के घर हुआ था. रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म वैसे तो 7 मई को हुआ था लेकिन बंगाली कैलेंडर के मुताबिक उनका जन्म बैसाख महीने के 25वें दिन हुआ था. इस तरह से द्रिक पंचांग के मुताबिक पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में टैगोर जयंती 9 मई को मनाई जाती है. रविंद्रनाथ टैगोर को बचपन में प्यार से घरवाले रवि बुलाते थे. वह अपने सभी 13 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. रवींद्रनाथ टैगोर को कविगुरु और विश्वकवि के नाम से भी पूरी दुनिया में जाना जाता है. रवींद्रनाथ टैगोर ने 42 साल की उम्र में मृणालिनी देवी से शादी की थी. 

भारत को दुनिया के साहित्यिक मानचित्र पर रखा 
रविंद्रनाथ टैगोर को बालपन से परिवार में साहित्यिक माहौल मिला, इसी के चलते उन्हें साहित्य से बहुत लगाव रहा. उन्हें बचपन से ही कविताएं और कहानियां लिखने में रूचि थी. रवींद्रनाथ टैगोर ने सिर्फ 8 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी थी. 16 साल की उम्र में अपना पहला कविता संग्रह प्रकाशित किया था.

रवींद्रनाथ टैगोर ने  ड्राइंग और पेंटिंग में हाथ आजमाया और कई सफल प्रदर्शनियां आयोजित कीं. टैगोर ने भारत को दुनिया के साहित्यिक मानचित्र पर रखा है. कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को साल 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया. वह इस श्रेणी में सम्मान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं. यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें गीतांजलि नामक कविताओं के संग्रह के लिए मिला. बंगाली गीतों का संग्रह गीतांजलि है. रविंद्रनाथ टैगोर ने नोबेल पुरस्कार को सीधे स्वीकार नहीं किया बल्कि उनकी जगह पर ब्रिटेन के एक राजदूत ने पुरस्कार लिया था.

बनना चाहते थे बैरिस्टर
रवीद्रनाथ टैगोर की शुरुआती पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई थी. वह बैरिस्टर बनना चाहते थे. अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजस्टोन पब्लिक स्कूल में दाखिला ले लिया. बाद में लंदन यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था लेकिन साल 1880 में बिना कानून की डिग्री लिए ही वह वापस स्वदेश आ गए. वह जब पढ़ाई करके लंदन से वापस भारत आए तो उन्होंने फिर से लिखना शुरू कर दिया. रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन में लगभग 2230 गीतों की रचना की थी और अधिकतर को संगीत भी दिया था.

गुरुदेव की रचनाओं पर बन चुकी है कई फिल्म
साल 1953 में रिलीज हुई बिमल रॉय की फिल्म 'दो बीघा जमीन' अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी थी. इस फिल्म की कहानी रवींद्रनाथ टैगोर की बंगाली रचना 'दुई बीघा जोमी' पर आधारित थी.

रवींद्रनाथ टैगोर की लघु कहानी पर रितुपर्णो घोष ने साल 2003 में 'चोखेर बाली' बनाई. हिंदी ड्रामा फिल्म 'बायोस्कोपवाला' साल 2017 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म की कहानी रवींद्रनाथ टैगोर की काबुलीवाला की एक छोटी कहानी पर आधारित थी. काबुलीवाला कहानी पर बिमल रॉय ने 1961 पर फिल्म 'काबुलीवाला' बनाई थी.

...तो इसलिए लौटा दिया था नाइट हुड का सम्मान
ब्रिटिश प्रशासन ने साल 1915 में रवींद्रनाथ टैगोर को नाइट हुड की उपाधि दी थी. उस समय जिस शख्स के पास नाइट हुड की उपाधि होती थी, उसके नाम के साथ सर लगाया जाता था. रवींद्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला हत्याकांड की घोर निंदा करते हुए अंग्रेजों को नाइट हुड का सम्मान वापस लौटा दिया था.

जब टैगोर मिले थे अल्बर्ट आइंस्टीन से 
अल्बर्ट आइंस्टीन और रवींद्रनाथ टैगोर दोनों ही दुनिया के बुद्धिमान व्यक्तियों में से थे. रवींद्रनाथ टैगोर की 14 जुलाई 1930 को बर्लिन में आंइस्टीन के घर पर मुलाकात हुई थी. स्कूपवूप के एक लेख के मुताबिक, आइंस्टीन ने टैगोर से पूछा था कि क्या आप दुनिया से अलग दिव्य में यकीन रखते हैं. जिस पर टैगोर ने जवाब देते हुए कहा कि इंसान का अनंत व्यक्तित्व ब्रह्मांड को जानता है. ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे इंसान कम नहीं कर सकता है. इससे साबित होता है कि ब्रह्मांड का सत्य मानव सत्य है. आइंस्टीन और टैगोर ने काफी देर तक बात की और उनकी बातचीत पर लेख भी छपे थे.

रखी थी इस विश्वविद्यालय की नींव
टैगोर ने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों को चुनौती देने के लिए शांतिनिकेतन में एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना की थी. इस विद्यालय में टैगोर ने भारत और पश्चिमी परंपराओं को मिलाने की कोशिश की. रविंद्रनाथ टैगोर विद्यालय में ही रहने लगे. बाद में साल 1921 में यह विद्यालय विश्व भारती विश्वविद्यालय बन गया.

1951 में विश्व भारती विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित किया गया था. आज भी यहां पर खुली जगहों में और पेड़ों के नीचे क्लास ली जाती हैं. आपको मालूम हो कि रवींद्रनाथ टैगोर के पिता ने 1863 में एक आश्रम की स्थापना की थी, उसे ही रवींद्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन में बदला था. प्रोस्टेट कैंसर होने के बाद 7 अगस्त 1941 को रवींद्रनाथ टैगोर का निधन हो गया था.

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार
1. यदि आप सभी त्रुटियों के लिए दरवाजा बंद कर दोगे तो सच अपने आप बाहर बंद हो जाएगा.
2. तथ्य कई हैं लेकिन सच एक ही है.
3. जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता उसी को क्रोध अधिक आता है.
4. आप नदी को सिर्फ खड़े होकर और या पानी को घूरकर पार नहीं कर सकते.
5. दोस्ती की गहराई परिचित की लंबाई पर निर्भर नहीं करती.
6. जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़िया को आश्रय देता है. उसी तरह मौन रहना तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है.
7. विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण के कारखाने हैं और अध्यापक उन्हें बनाने वाले कारीगर हैं.
8. खुश रहना बहुत सरल है लेकिन सरल रहना बहुत मुश्किल.
9. उपदेश देना आसान है पर उपाय बताना कठिन.
10. प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता, बल्कि स्वतंत्रता देता है.


 

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