राजस्थान के निकाय चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबदबा देखने को मिला है. छोटे कस्बों से लेकर आदिवासी इलाकों तक बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. वहीं, किसान बाहुल्य क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है. चुनाव नतीजों ने कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ा दी है, जबकि बीजेपी ने इसे भजनलाल सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताया है.
10 नगर निगमों में बीजेपी को बढ़त
प्रदेश के 10 नगर निगमों के नतीजों में बीजेपी ने 5 नगर निगमों में जीत दर्ज की है. कांग्रेस को सिर्फ एक नगर निगम में सफलता मिली है, जबकि 4 नगर निगमों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और यहां त्रिशंकु स्थिति बनी है. नगर पालिका की बात करें तो कुल 252 नगर पालिका में बीजेपी ने 144, कांग्रेस ने 92 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 16 में जीत हासिल की है. वहीं, 47 नगर परिषदों में बीजेपी ने 21, कांग्रेस ने 17 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 9 पर जीत दर्ज की है.
4 हजार से ज्यादा वार्डों में बीजेपी की जीत
निकाय चुनाव में बीजेपी ने 4,000 से ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज की है. कांग्रेस को 3,450 से ज्यादा वार्डों में सफलता मिली, जबकि 2,400 से ज्यादा वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया. बीजेपी की इस सफलता के पीछे युवाओं को नौकरी देने और पेपर लीक पर लगाम लगाने जैसे मुद्दों को अहम माना जा रहा है. हालांकि, बड़े शहरों में यूजीसी के विरोध का असर बीजेपी के प्रदर्शन पर दिखाई दिया.
एक-एक वोट पर अटकी जीत-हार
डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर नगर पालिका चुनाव का एक नतीजा खास चर्चा में है. यहां अलग-अलग वार्डों में बीजेपी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के उम्मीदवारों को महज एक-एक वोट मिला. खास बात यह रही कि बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र को उस वार्ड में अपना वोट भी नहीं मिला, जहां से वह चुनाव लड़ रहे थे.
वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीजेपी की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए राजस्थान की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह शानदार जीत संभव हुई है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बीजेपी की जीत पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह जनादेश पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विकास, सुशासन और जनसेवा की नीति पर जनता की मुहर है.
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