ढाई साल बाद सचिन पायलट पर क्यों हमलावर हैं अशोक गहलोत? पार्टी में नहीं मिल रहा समर्थन

राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की लगातार बयानबाजी से खलबली मची हुई है. इस बार गहलोत ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने को लेकर सफाई दी. उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए साजिश के तहत अचानक से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था. इस दौरान गहलोत ने सचिन पायलट को भी निशाने पर लिया है.

Sachin Pilot and Ashok Gehlot
gnttv.com
  • जयपुर,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर बयानों से भूचाल आया है. जब भी लगता है कि सूबे की कांग्रेस सबकुछ ठीक चल रहा है तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बैक गियर लगा देते हैं. सोशल मीडिया पर जैसे हीं सचिन पायलट को लेकर खबर आती है कि वो राजस्थान की राजनीति में लौट सकते हैं, तो गहलोत बहाना ढूँढ ढूंढ कर पायलट पर बोलना शुरू कर देते है. राजनीति में आने के बाद से पहली बार बिना किसी पद के 75 साल के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक जीवन जयपुर में काट रहे हैं.

अशोक गहलोत ने रविवार की दोपहर मीडिया को बुलाकर बिना किसी के पूछे ही खुद ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने को लेकर सफाई दी. गहलोत ने पहली बार दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए साजिश के तहत अचानक से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था. इंडिया गठबंधन की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस हाईकमान पर इस हमले को भी गहलोत की पार्टी में पूछ नहीं होने से जोड़ कर देखा जा रहा है.

गहलोत ढाई साल बाद आक्रामकता क्यों?
पिछले एक महीने में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर सरकार गिराने की साजिश करने और बीजेपी से मिले होने को लेकर तीसरी बार हमला बोला है. माना जाता है कि सोशल मीडिया पर सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की खबरें चलते देख गहलोत ने पायलट पर हमला तेज किया है. गहलोत को लगता है कि सचिन पायलट अगर प्रदेश अध्यक्ष बन जाते हैं तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो जाएंगे. जिस ढंग से राहुल गांधी केरल से लेकर कर्नाटक तक फ़ैसले ले रहे हैं, कहीं पायलट को लेकर कोई फैसला न ले लें. गहलोत रविवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पार्लर में हेयर कट और दूसरे सर्विस लेने आए थे, जहाँ से फोन कर एजेंसी और कुछ रिपोर्टर को बुलाया गया कि अशोक गहलोत बयान देना चाहते हैं और फिर बीजेपी के  बहाने पायलट पर जमकर निशाना साधा.

राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर बढ़ा गुस्सा-
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में मौजूदा सांसद नीरज डांगी को फिर से रिपीट करने का फैसला किया. सांसद डांगी पहले गहलोत के क़रीबी थे. लेकिन बाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़ास हो गए और सचिन पायलट से उनकी नज़दीकी बढ़ गई. गहलोत गुट ने डांगी की उम्मीदवारी का जमकर विरोध किया. यहाँ तक की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर बधाई तक नहीं दिया. अगले दिन पर्यावरण पर बोलने के लिए मीडिया को घर पर बुलाया और फिर बिना पूछे शुरू हो गए कि सचिन पायलट बीजेपी के धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर सरकार गिरा रहे थे और इसके बदले कांग्रेस विधायकों ने करोड़ों लिए थे, जो अब तक लौटाए नहीं है.

पुष्कर प्रशिक्षण शिविर में अनदेखी से थे खफा-
इसके पहले अभी एक जून को कांग्रेस के ज़िलाध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर में आए. लेकिन अशोक गहलोत पर्याप्त इज्जत नहीं मिलने की वजह से किशनगढ़ एयरपोर्ट से वापस जयपुर आ गए. राहुल गांधी के साथ राजस्थान के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में हिस्सा नहीं लिया.

ओएसडी शशिकांत फिर सक्रिय-
अशोक गहलोत दिल्ली में संगठन महासचिव बने तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दफ्तर में उन्हें सहयोग के तौर पर शशिकांत शर्मा नाम के व्यक्ति को काम करने के लिए दिया गया था. शशिकांत शर्मा अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद जयपुर बस गए और फिर मुख्यमंत्री निवास में सबसे ताकतवर व्यक्ति बन गए थे. शशिकांत शर्मा की वजह से गहलोत के पुराने वफादार छोड़ कर चले गए. मगर शशिकांत शर्मा का रसूख़ बढ़ता गया. गहलोत मुख्यमंत्री के पद से हटे तो शशिकांत शर्मा गहलोत के लिए दिल्ली में काम करने लगे. लेकिन कुछ एक महीने से लगातार जयपुर में दिखाई दे रहे हैं और माना जा रहा है कि अशोक गहलोत के आक्रामक तेवरों के पीछा शशिकांत शर्मा ही हैं. अशोक गहलोत जब बाल कटवाने कॉंस्टिट्यूशन क्लब आए थे तो अचानक से मीडिया कर्मियों को कॉंस्टिट्यूशन क्लब बुलाया गया कि अशोक गहलोत महत्वपूर्ण बात करना चाहते हैं. इस दौरान अशोक गहलोत के साथ शशिकांत शर्मा भी मौजूद थे. अशोक गहलोत के बयान के बाद भी जब मीडिया में गहलोत का बयान कहीं नहीं चल रहा था तो शशिकांत शर्मा ने फोन करके  सभी मीडिया हाउस को चलाने के लिए कहना शुरू किया.

हालांकि रोज-रोज सचिन पायलट पर हमला करने को लेकर अशोक गहलोत खुद ही राजस्थान कांग्रेस पार्टी में अकेले पड़ गए हैं. इस मसले पर कांग्रेस पार्टी को कोई भी विधायक या नेता अशोक गहलोत के साथ खड़ा हुआ नहीं दिखाई दे रहा है. पार्टी का मानना है कि कांग्रेस संकट के समय में है और इस तरह से राहुल गांधी के मिशन को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए.

(शरत कुमार की रिपोर्ट)

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