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मौसम की पहली बारिश, अंडरपास में फंस गई बस, JCB से रेस्क्यू, Video आया सामने

गुजरात के राजकोट में मौसम की पहली बारिश में हुई. इस दौरान का एक वीडियो सामने आया है. जिसमें एक बस अंडरपास में 4-5 फुट पानी भर गया. जिसमें एक बस फंस गई. जिसे लोग धक्का देकर निकालते नजर आ रहे हैं.

Rajkot News
रौनक मजीठिया
  • राजकोट,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

गुजरात में राजकोट जिले के गोंडल शहर में आज मानसून सीजन की पहली नोंधपात्र बारिश हुई. शाम के समय करीब दो घंटे में लगभग दो इंच मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. सीजन की पहली ही तेज बारिश ने प्रशासन की प्री-मानसून तैयारियों की पोल खोलकर रख दी. इस दौरान एक बस पुल के नीचे पानी में फंस गई. जिसका वीडियो सामने आया है. लोग बसों को धक्का देकर निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

अंडरपास में फंस गई बस-
गोंडल शहर के उमवाड़ा रेलवे अंडरब्रिज में चार से पांच फीट तक बारिश का पानी भर गया. इसी दौरान जूनागढ़-दाहोद रूट की एक एसटी बस अंडरब्रिज से गुजरने का प्रयास कर रही थी, लेकिन बीच रास्ते में ही पानी के बीच फंस गई। बस में 25 से 30 यात्री सवार थे. लगातार हो रही भारी बारिश और अंडरब्रिज के बीच बस फंस जाने से यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया.

पहली बारिश में ही हुआ बेहाल-
घटना की जानकारी मिलते ही गोंडल नगर पालिका की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन राजभा जाडेजा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. फायर ब्रिगेड की टीम को तत्काल बुलाया गया और जेसीबी की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाला गया. मानसून की पहली ही बारिश में गोंडल प्रशासन की प्री-मानसून तैयारियों की कमजोरियां उजागर हो गईं.

मूसलाधार बारिश हुई-
पूरे मामले को लेकर गोंडल नगर पालिका की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन राजभा जाडेजा ने बताया कि अचानक हुई मूसलाधार बारिश के कारण अंडरब्रिज में चार से पांच फीट तक पानी भर गया था. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और जेसीबी की सहायता से बस को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और सभी यात्री सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि भारी बारिश के दौरान अंडरब्रिज से पानी निकालने के लिए हाई-पावर मोटर लगाई जाती है, लेकिन तेज बारिश के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे मोटर काम नहीं कर सकी और अंडरब्रिज में पानी भर गया. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह रेलवे अंडरब्रिज है, इसलिए रेलवे की भी जिम्मेदारी बनती है. इस संबंध में रेलवे अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं,  ताकि मानसून के दौरान भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो.

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