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'भले ही सफेद चादर कफन में बदल जाए, लेकिन अनशन नहीं...', देवेंद्र महतो का ऐलान

रांची में अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने कहा कि भले ही सफेद चादर कफन में बदल जाए, लेकिन जब तक छात्रों की बातचीत सरकार के साथ सफल नहीं हो जाती, तब तक अनशन नहीं तोड़ेंगे.

Devendra Nath Mahto
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC में गड़बड़ी के खिलाफ छात्र आंदोलन जारी है. अभ्यर्थी न्याय मंच को लीड कर रहे देवेंद्र महतो छठे दिन भी अनशन पर हैं. उनका मनोबल सातवें आसमान पर है. उनकी तबीयत बिगड़ रही है. लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि सफेद चादर भले ही कफन में बदल जाए, लेकिन वार्ता के सफल होने तक अनशन नहीं तोड़ूंगा.

देवेंद्र महतो की तबीयत कैसी है?
डॉक्टर्स ने बताया कि उन्हें चेस्ट में इन्फेक्शन है, शुगर लो है, बीपी लो है और अस्पताल में तुरन्त भर्ती कराए जाने की जरूरत है. डॉक्टर्स, SDM और थाना प्रभारी लगातार उनको इलाज करवाने की सलाह दे रहे हैं. लेकिन वो ठान चुके है कि जब तक छात्रों की वार्ता सरकार से सफल नहीं हो जाती, तब तक वो यहां से नहीं हिलेंगे.

सफेद चादर कफन में बदल जाए, लेकिन अनशन नहीं टूटेगा- महतो
देवेंद्र महतो ने कहा कि घरवालों से वो बातें नहीं करते, क्योंकि वो इमोशनल हो जाएंगे और आंदोलन के प्रति कमजोर हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि सफेद चादर जो वो ओढ़े हुए हैं, भले ही कफन में बदल जाए. लेकिन वार्ता के सफल होने तक वो अनशन नहीं तोड़ेंगे.

फूट फूटकर रोने लगे महेंद्र प्रसाद-
देवेंद्र महतो के साथी हजारीबाग के महेंद्र प्रसाद 4 दिन से अनशन पर हैं. वो फूट फूटकर रोने लगे. उन्होंने कहा कि घर में दो बेटियां है. लेकिन वो कॉल नहीं करते. ऐसे हालात में घरवाले देखेंगे, तो वो भी टूट जाएंगे. 

वो दुखों को लगातार सहते आये हैं. इंजीनियरिंग की डिग्री 2014 में लेने के बावजूद जब नौकरी नहीं लगी तो घर वाले निक्कमा समझने लगे. उन्होंने उसके बाद संघर्ष के लिए घर ही छोड़ दिया.

उन्होंने JPSC और JSSC दिया. लेकिन पेपर लीक होते रहे हैं और इतने पैसे नहीं थे कि सीट खरीद सकें. अपना दर्द सुनाते समय महेंद्र रोने लगे.

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