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प्रयागराज में 'रंग दे बसंती' का अनोखा रंग, कविता से राष्ट्रप्रेम और पेंटिंग से अपराध पर संदेश

'रंग दे बसंती' कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए देशप्रेम, भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और युवाओं की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने रखा. कविताओं और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं से अपनी संस्कृति और जड़ों को समझने के साथ देश के प्रति सकारात्मक सोच रखने की अपील की गई.

रंग दे बसंती
आनंद राज
  • प्रयागराज ,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

प्रयागराज में साहित्य, कला और राष्ट्रप्रेम को समर्पित 'रंग दे बसंती' कार्यक्रम का आयोजन हिंदुस्तानी एकेडमी के सभागार में किया गया. रंग दे बसंती समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कवि सम्मेलन के साथ चित्रकला प्रतियोगिता भी हुई. कार्यक्रम का मकसद युवाओं को साहित्य और कला के जरिए भारतीय संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र प्रेम से जोड़ना रहा. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आचार्य शांतनु जी महाराज रहे. उनके अलावा मुरारी मंडल, अभिजीत मिश्रा, अभिषेक अवस्थी, आकांक्षा बुंदेला, बजरंग नाथ तिवारी, संक्षेप 'अक्षत' और डॉ. विनय सेन सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे.

कविताओं के जरिए दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश
'रंग दे बसंती' कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए देशप्रेम, भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और युवाओं की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने रखा. कविताओं और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं से अपनी संस्कृति और जड़ों को समझने के साथ देश के प्रति सकारात्मक सोच रखने की अपील की गई. आयोजकों ने कहा कि संस्कृति, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है. इसी सोच के साथ साहित्य और कला को कार्यक्रम का माध्यम बनाया गया.

चित्रकला प्रतियोगिता में अपराध बना विषय
कार्यक्रम में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता भी खास आकर्षण रही. इसमें छात्राओं को समाज में बढ़ते अपराध और उसके असर को चित्रों के जरिए दिखाने का विषय दिया गया. छात्राओं ने इस विषय पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाए. कुछ छात्राओं ने अपने चित्रों में माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी को भी शामिल किया.

छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपराध को समझाने के लिए ऐसे चेहरों और घटनाओं को चित्रों में जगह दी, जिनके बारे में उन्होंने बचपन से प्रयागराज और प्रदेश में सुना है. उनका कहना था कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से अतीक अहमद का नाम अपराध से जुड़ी चर्चाओं में सुनती आई हैं. इसलिए अपराध के विषय पर चित्र बनाते समय उन्होंने इन्हीं चेहरों को अपनी कला के जरिए दिखाया.

कला के जरिए सामाजिक जागरूकता का संदेश
प्रतियोगिता में छात्रों की रचनात्मकता के साथ सामाजिक जागरूकता भी देखने को मिली. चित्रों में अपराध और उसके समाज पर पड़ने वाले असर को दिखाने की कोशिश की गई. आयोजकों ने साफ किया कि इन चित्रों का मकसद किसी व्यक्ति का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि अपराध और उसके दुष्परिणामों को सामने लाना था. कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि साहित्य और कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए समाज में जागरूकता पैदा करने और युवाओं को सही दिशा देने का काम भी किया जा सकता है.

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