दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने सरकारी दफ्तरों में समय पर काम कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में हर कर्मचारी को बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगाने का आदेश जारी किया है. यह नियम छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अफसर तक सभी पर लागू होगा.
दिल्ली सरकार में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ये सख्त कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है अब केवल कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी.
क्यों लिया गया फैसला?
हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा आईटीओ स्थित राज्य GST कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी अनुपस्थित पाए गए. इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने यह निर्देश जारी किया.
क्या है नया नियम?
अब अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है. दरसल पिछले दिनों प्रदूषण के चलते दिल्ली सरकार और एमसीडी में काम करने वाले कर्मचारियों की टाइमिंग्स को चेंज किया गया था ताकि दिल्ली में प्रदूषण को कम किया जा सके. पहले प्रदूषण और GRAP के कारण कई दफ्तरों का समय बदला गया था, लेकिन अब GRAP हटने के बाद पुराने समय को फिर से लागू कर दिया गया है. नए आदेश के मुताबिक, एमसीडी के सभी दफ्तर सुबह 9 बजे खुलेंगे और शाम 5:30 बजे तक काम होगा. दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेंगे.
समय की पाबंदी जरूरी
सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह 9:30 बजे तक कार्यालय पहुंचना होगा, ताकि कामकाज समय पर शुरू हो सके. नियम को नहीं मानने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. इन मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं होगी. देर से आना और उपस्थिति दर्ज न करना, समय से पहले कार्यालय छोड़ना, ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
रिपोर्टिंग सिस्टम हुआ मजबूत
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) रोजाना उपस्थिति रिपोर्ट तैयार करेगा. ये रिपोर्ट दोपहर 12 बजे तक मुख्य सचिव को भेजी जाएगी. हर महीने की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी. सभी विभागों को अपने कार्यालयों में बायोमेट्रिक सिस्टम लगाना और उसे सुचारु रूप से संचालित करना होगा. साथ ही, सभी कर्मचारियों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा.
जवाबदेही पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह नियम सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे किसी भी पद पर हों. इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
(सुशांत मेहरा की रिपोर्ट)