मई में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93% पहुंची, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

मई के दौरान जिन वस्तुओं में सबसे अधिक महंगाई दर्ज की गई, उनमें सोने-चांदी के आभूषण, टमाटर, अदरक, किशमिश और मुनक्का शामिल हैं. इन उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली.

Retail Inflation
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST
  • मई में CPI महंगाई बढ़कर 3.93%
  • खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

देश में खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) मई 2026 में बढ़कर 3.93% हो गई है. अप्रैल में यह 3.48% थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई दर में इजाफा हुआ है. हालांकि महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य के करीब बनी हुई है.

फूड इंफ्लेशन ने बढ़ाई चिंता
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.78% पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 4.2% थी. इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है. सब्जियों, मसालों और सूखे मेवों की कीमतों में बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को ऊपर धकेला है.

इन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े
मई के दौरान जिन वस्तुओं में सबसे अधिक महंगाई दर्ज की गई, उनमें सोने-चांदी के आभूषण, टमाटर, अदरक, किशमिश और मुनक्का शामिल हैं. इन उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. दूसरी ओर, आलू, मटर, जीरा, कार-जीप तथा मोटरसाइकिल-स्कूटर जैसी वस्तुओं में महंगाई का दबाव अपेक्षाकृत कम रहा.

RBI ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान
पिछले सप्ताह RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था. RBI का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और उसके असर से देश में पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं. इसका प्रभाव आने वाले महीनों में उपभोक्ता कीमतों पर और दिखाई दे सकता है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर
मई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में कुल 7.4% और डीजल की कीमतों में 8.4% की बढ़ोतरी हो चुकी है. RBI के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का महंगाई पर सीधा असर पड़ रहा है. केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि इससे हेडलाइन महंगाई में करीब 36 बेसिस पॉइंट तक की वृद्धि हो सकती है. इसके अलावा परिवहन और अन्य लागत बढ़ने से दूसरे क्षेत्रों में भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.

आम लोगों के लिए क्या मतलब?
महंगाई में यह बढ़ोतरी संकेत देती है कि आने वाले समय में रसोई का खर्च और बढ़ सकता है. खासकर खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा. हालांकि महंगाई अभी RBI की तय सीमा के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.

 

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