Carry Bag के लिए अलग से पैसे वसूलना पड़ा भारी, कोर्ट ने लगाया 21 हजार का जुर्माना... जानें क्या कहता है कानून 

इससे पहले चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने भी बाटा इंडिया लिमिटेड पर जुर्माना लगाया था. बाटा ने एक पेपर बैग के लिए एक जूता बॉक्स ले जाने के लिए एक ग्राहक से 3 रुपये चार्ज किये थे, जिसके बाद आयोग ने कंपनी को 9,000 रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया था.

Carry bags
अपूर्वा सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST
  • चंडीगढ़ में भी हुआ था ऐसा ही केस 
  • 1986 उपभोक्ताओं के व्यापक हित वाले इन नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है

हम जब भी किसी मॉल या स्टोर पर जाते हैं तो अधिकतर स्टोर्स हम लोगों से अलग से कैरी बैग के लिए पैसे चार्ज करते हैं. वे इसे 3 रुपये या 12-15 रुपये में देते हैं. अब हाल ही में इसे लेकर ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक स्टोर को कैरी बैग के लिए पैसे चार्ज करने पर लेने के देने पड़ गए. रिटेलर ने जब एक ग्राहक से एक कैरी बैग के लिए 12 रुपये चार्ज किए तो उसे उल्टा ग्राहक को ही 21,000 रुपये का मुआवजा देना पड़ा. दरअसल, ये आंध्र प्रदेश के विजाग शहर के कंज्यूमर कोर्ट ने ये निर्णय अपने एक आदेश में दिया है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, विशाखापत्तनम के एक वकील, सीपना रामा राव ने एक 600 रुपये से अधिक के कपड़े खरीदे थे. चेकआउट के समय उन्हें जब एक कैरी बैग के लिए 12 रुपये देने के लिए कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया. जब कैशियर उन्हें ऐसा करने के लिए जोर दिया तो उन्होंने स्टोर मैनेजर के साथ इस मामले को उठाया. 

मैनेजर ने भी उन्हें बैग फ्री में देने से मना कर दिया. जब राव ने उन्हें समझाया कि स्टोर का विज्ञापन करने वाले बैग के लिए शुल्क लेना अवैध है, तो वे नहीं मानें. इसके बाद ग्राहक ने शहर में कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजे की मांग की.

जिसके बाद आयोग ने दुकान को मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजे के तौर पर 21,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है.

चंडीगढ़ में भी हुआ था ऐसा ही केस 

दरअसल, चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में बाटा इंडिया लिमिटेड पर भी जुर्माना लगाया था. बाटा ने एक पेपर बैग के लिए एक जूता बॉक्स ले जाने के लिए एक ग्राहक से 3 रुपये चार्ज किये थे, जिसके बाद आयोग ने कंपनी को 9,000 रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया. उपभोक्ता आयोग के मुताबिक, अगर कंपनियां पर्यावरण की रक्षा के लिए पर्यावरण के अनुकूल बैग प्रदान कर रही हैं, तो उन्हें ग्राहकों को ये फ्री वाला बैग देना चाहिए. 

क्या कहता है कानून?

GNT Digital ने इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के वकील देवेश अजमानी और रांची में प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट प्रीतम मंडल से बात की. इसपर एडवोकेट देवेश अजमानी  कहते हैं कि ये कानूनी रूप से मान्य है. प्रोडक्ट अगर उसी स्टोर से खरीदा जाता है तो स्टोर कस्टमर्स से बैग के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकते हैं. इसके अलावा, मौजूदा कानूनों के तहत, दुकानदारों को कैरी बैग के लिए उपभोक्ताओं से कोई दूसरा शुल्क लेने की अनुमति नहीं है, क्योंकि बैग में उनके लोगो और नाम होते हैं, इसलिए यह उनके विज्ञापन का हिस्सा बन जाता है. 

वहीं, रांची के एडवोकेट प्रीतम मंडल कहते हैं कि एक ही स्टोर से खरीदे गए सामान को ले जाने के लिए कस्टमर्स को फ्री में कैरी-बैग देना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (Consumer protection act, 1986) के तहत कस्टमर-सेटिस्फैक्शन क्राइटेरिया का ही एक हिस्सा है. कंज्यूमर कमीशन के आदेश पूरे भारत में मान्य हैं और कंज्यूमर इसी मुद्दे पर अपनी शिकायतों के निवारण के लिए कहीं और इस आदेश का हवाला दे सकते हैं.

दोनों ही एडवोकेट की मानें, तो वर्तमान परिदृश्य में कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 उपभोक्ताओं के व्यापक हित वाले इन नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है. और ये भी हो सकता है जब ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई, विक्रेताओं पर जांच, देश भर में हेल्पलाइन और जागरूकता पैदा की जाए.
 


 

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