गौशाला में बन रहा इको-फ्रेंडली गुलाल… मोदी-योगी तक पहुंचेगा रंग, पांच प्रदेशों से उमड़ी जोरदार डिमांड

इस वर्ष गाय के गोबर से प्राकृतिक ‘गोमय गुलाल’ तैयार किया गया है. यह गुलाल पूरी तरह केमिकल मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल है. खास बात यह है कि इस गुलाल को देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi, राष्ट्रपति Droupadi Murmu और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सहित कई प्रमुख हस्तियों को भी भेजा जाएगा.

Eco-friendly gulal
gnttv.com
  • सहारनपुर,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:27 PM IST

होली के पावन पर्व को इस बार सतरंगी और सुरक्षित बनाने के लिए सहारनपुर नगर निगम ने अनूठी पहल की है. नगर निगम द्वारा संचालित मां शाकुंभरी कान्हा उपवन गौशाला में इस वर्ष भी गाय के गोबर से प्राकृतिक ‘गोमय गुलाल’ तैयार किया गया है. यह गुलाल पूरी तरह केमिकल मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल है. खास बात यह है कि इस गुलाल को देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi, राष्ट्रपति Droupadi Murmu और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सहित कई प्रमुख हस्तियों को भी भेजा जाएगा.

गौशाला प्रभारी एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि यह प्रदेश की पहली कान्हा गौशाला है, जहां गोमय गुलाल का व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है. अब तक करीब तीन कुंतल गुलाल तैयार किया जा चुका है. इसे पांच आकर्षक रंगों- लाल, पीला, हरा, भगवा और बैंगनी—में बनाया गया है. यह गुलाल प्राकृतिक तत्वों से तैयार किया गया है और पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है. इससे त्वचा, आंखों या पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होता.

किफायती दरों पर उपलब्ध
नगर निगम ने गोमय गुलाल की पैकेजिंग भी आकर्षक तरीके से की है. इसे 100 ग्राम और 200 ग्राम के पैकेट में बाजार में उतारा गया है. 100 ग्राम पैकेट की कीमत 40 रुपये और 200 ग्राम पैकेट की कीमत 70 रुपये रखी गई है, जो बाजार में मिलने वाले रासायनिक गुलाल की तुलना में सस्ता और सुरक्षित विकल्प है. यह गुलाल नगर निगम परिसर, शहर के प्रमुख स्थानों और गौशाला आउटलेट्स पर उपलब्ध रहेगा. साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी इसकी बिक्री की जा रही है, ताकि अन्य जिलों और प्रदेशों से आने वाली मांग को पूरा किया जा सके.

पर्यावरण संरक्षण और गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा
डॉ. संदीप मिश्रा ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस होली पर प्राकृतिक गोमय गुलाल का उपयोग करें और इस पहल का हिस्सा बनें. उनका कहना है कि यह प्रयास स्वच्छता, श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ गौ संरक्षण में भी मददगार साबित होगा. साथ ही इससे गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने और सहारनपुर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने में भी मदद मिलेगी.

रिपोर्टर: राहुल कुमार

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