सहारनपुर के गांव नैनखेड़ी निवासी किसान शक्ति सिंह इन दिनों अपने अनोखे आम के बगीचे को लेकर चर्चा में हैं. यह कोई साधारण बगीचा नहीं, बल्कि उनकी दिवंगत पत्नी रविप्रभा की यादों से जुड़ा एक भावनात्मक संसार है. कोरोना काल में पत्नी को खोने के बाद शक्ति सिंह ने उनकी यादों को जिंदा रखने के लिए दुनिया के सबसे महंगे माने जाने वाले मियाजाकी आम के पौधे लगाए. इतना ही नहीं, उन्होंने इस विशेष किस्म के आम को अपनी पत्नी के नाम से जोड़ते हुए रवि मियाजाकी नाम दिया.
पत्नी की याद में लगाया दुनिया का सबसे महंगा
शक्ति सिंह बताते हैं कि उनकी पत्नी रविप्रभा को सुंदर और दुर्लभ किस्म के आम बेहद पसंद थे. सोशल मीडिया पर पहली बार मियाजाकी आम देखने के बाद वह इसके गहरे लाल रंग और आकर्षक रूप से काफी प्रभावित हुई थीं. उन्होंने इच्छा जताई थी कि एक दिन अपने बगीचे में भी इस आम का पेड़ लगाएंगी. पत्नी की इस अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए शक्ति सिंह ने काफी प्रयास के बाद मध्य प्रदेश के जबलपुर से मियाजाकी आम के पौधे मंगवाए.
शुरुआत में उन्होंने पहला पौधा अपने बाग में लगाया था, लेकिन जैसे ही पेड़ पर पहला आम आया, वह रातोंरात चोरी हो गया. पत्नी की यादों से जुड़े इस पेड़ से आम चोरी होने का दर्द शक्ति सिंह को अंदर तक झकझोर गया. इसके बाद उन्होंने बगीचे से पौधों को निकालकर अपने घर के आंगन में लगा दिया और उनकी संख्या बढ़ाकर दस कर दी. अब इन पेड़ों को कपड़ों के पर्दों से ढककर रखा जाता है ताकि बाहरी लोगों की नजर इन महंगे आमों पर न पड़े.
गरीबों को मुफ्त खिलाएंगे दुनिया का सबसे महंगा आम
इस वर्ष इन पेड़ों पर करीब 30 मियाजाकी आम लगे हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस आम की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन शक्ति सिंह ने फिलहाल इन्हें बेचने का फैसला नहीं किया है. उनका कहना है कि जब यह बगीचा पत्नी की याद में लगाया गया है तो इसका पहला सुख व्यापार नहीं, बल्कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान देखना होना चाहिए. इसलिए इस बार आम पकने पर वह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपने घर बुलाकर मुफ्त में मियाजाकी आम खिलाएंगे.
शक्ति सिंह कहते हैं कि जब भी वह इस छोटे से बगीचे में घूमते हैं और पेड़ों पर लगे आमों को देखते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि उनकी पत्नी आज भी उनके साथ हैं और इन आमों की खूबसूरती को निहार रही हैं. उनका मानना है कि सच्चा प्रेम दूरी या मृत्यु से खत्म नहीं होता, बल्कि यादों में जीवित रहता है. जिस तरह शाहजहां ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था, उसी तरह उन्होंने अपनी पत्नी रविप्रभा की स्मृतियों को संजोने के लिए इस रवि मियाजाकी बगीचे को प्रेम की एक जीवंत निशानी बना दिया है.
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