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भारत के इस राज्य के लोगों को नहीं देना पड़ता है इनकम टैक्स, जानिए इसके पीछे का कारण

यह एक ज्ञात तथ्य है कि भारत में प्रत्येक करदाता को हर साल अनिवार्य रूप से आयकर दाखिल करना पड़ता है. वित्त मंत्रालय हर साल वार्षिक बजट पेश करने के दौरान आयकर स्लैब में बदलाव के मामलों को देखता है.

Sikkim
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

प्रत्येक व्यक्ति जो आय की एक निश्चित राशि कमाता है, उसे भारत सरकार का उसका कुछ हिस्सा टैक्स के रूप में देना होता है. देश के हर टैक्सपेयर के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना अनिवार्य है. वित्त मंत्रालय हर साल वार्षिक बजट पेश करने के दौरान आयकर स्लैब में बदलाव के मामलों को देखता है. हालांकि,एक भारतीय राज्य है जहां के निवासियों को टैक्स नहीं देना पड़ता है.

हिमालय में स्थित और सुंदर अल्पाइन घास के मैदानों, नीली-हरी पहाड़ियों, ग्लेशियरों और जंगली फूलों का घर सिक्किम,भारत के सबसे अच्छे पूर्वोत्तर राज्य में से एक है. सिक्किम, जिसकी अनुमानित जनसंख्या 6.74 लाख है, को आयकर भुगतान से छूट प्राप्त है.

सिक्किम को क्यों नहीं देना पड़ता टैक्स?
छोटा पहाड़ी उत्तरपूर्वी राज्य,सिक्किम उत्तर और उत्तर पूर्व में तिब्बत, पूर्व में भूटान, पश्चिम में नेपाल और दक्षिण में पश्चिम बंगाल की सीमाओं को छूता है. सिक्किम एक पूर्ववर्ती साम्राज्य था जो इस शर्त पर भारत में विलय हो गया था कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371 (एफ) में परिकल्पित अपने पुराने कानूनों और विशेष स्थिति के साथ जारी रहेगा. यही कारण है कि राज्य सिक्किम आयकर नियमावली 1948 (Tax Manual)का पालन करता है. इस कर नियमावली के तहत सिक्किम के निवासियों को केंद्र को कर नहीं देना पड़ता है.

सिक्किम के कर कानूनों को 2008 में निरस्त कर दिया गया था, जहां केंद्रीय बजट में धारा 10 (26AAA) की घोषणा की गई थी, जिसमें राज्य के निवासियों को करों का भुगतान करने से छूट दी गई थी. राज्य के निवासियों के पास पैन कार्ड की अनिवार्य आवश्यकता भी नहीं है. इससे पहले, बाजार नियामक सेबी ने भारतीय प्रतिभूति बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए सिक्किम के निवासियों के लिए पैन की आवश्यकता को छूट दी थी.

सिक्किम का इतिहास
सिक्किम पर एक बौद्ध पुजारी-राजा का शासन था जिसे चोग्याल के नाम से जाना जाता था. यह 1890 में ब्रिटिश भारत का एक रियासत बन गया. साल 1947 के बाद, सिक्किम ने भारत गणराज्य के साथ अपनी संरक्षित स्थिति जारी रखी. इसने हिमालयी राज्यों में उच्चतम साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय का आनंद लिया. साल 1973 में चोग्याल के महल के सामने शाही-विरोधी दंगे हुए. 1975 में, लोगों द्वारा राजशाही को हटा दिया गया था. 1975 में एक जनमत संग्रह के कारण सिक्किम भारत के 22वें राज्य के रूप में शामिल हुआ.

सिक्किम की आधिकारिक भाषाओं में अंग्रेजी, नेपाली, सिक्किमी और लेप्चा शामिल हैं. राज्य में संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से अतिरिक्त आधिकारिक भाषाओं में गुरुंग, लिम्बु, मगर, मुखिया, नेवारी, राय, शेरपा और तमांग शामिल हैं.


 

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