12 राज्यों में SIR, अब तक मतदाता सूची से कटे 5 करोड़ 20 लाख से अधिक अयोग्य मतदाताओं के नाम, यहां देखें पूरा आंकड़ा 

देश के 12 राज्यों में हुए SIR अभियान में अब तक 5 करोड़ 20 लाख से अधिक अयोग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं. इस तरह  से कुल 10 फीसदी नाम हटाए जा चुके हैं. यहां आप जान सकते हैं कि SIR  अभियान के दौरान कहां से कितने नाम हटाए गए हैं. 

SIR in 12 States (File Photo: PTI)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

देश के 12 राज्यों में हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान में अब तक 5 करोड़ 20 लाख से अधिक अयोग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं. यह संख्या कुल मतदाताओं का 10  फीसद होती है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का पहला चरण बिहार में हुआ. दूसरे चरण के दौरान 11 प्रदेशों और एक केंद्र शासित प्रदेश के मतदाताओं को शामिल किया गया. नतीजा आया कि इस अभियान में मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं की संख्या लगभग 5.2 करोड़ हो गई.

...तो हटा दिए गए नाम
 इस अभियान की शुरुआत से पहले यानी 27 अक्टूबर, 2025 को एसआईआर की शुरुआत में संयुक्त मतदाता वर्ग लगभग 51 करोड़ था. इस हिसाब से भी ये संख्या कुल मतदाताओं के 10.2% बैठती है. दूसरे चरण के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 7.2 करोड़ नाम हटाए गए. हालांकि, इनमें से 2 करोड़ नाम नए मतदाताओं यानी पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं द्वारा फॉर्म 6 के माध्यम से और मौजूदा मतदाताओं द्वारा नए पते पर पंजीकरण (फॉर्म 8) के रूप में शामिल भी किए गए. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गोवा, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल और लक्षद्वीप की मतदाता सूचियों से 65 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरी पंजीकृत और 'अन्य' मतदाताओं की पहचान कर उन्हें हटा दिया गया.

इसके अलावा 6 करोड़ 32 लाख नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति और दावों पर बंगाल में न्यायिक प्रक्रिया तक शुरू की गई. बंगाल में न्यायिक अधिकारियों ने समुचित जांच प्रक्रिया से 27 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए. आंकड़ों के मुताबिक इन SIR वाले प्रदेशों में 13 करोड़ नाम वाले लोग मतदाता सूची में पंजीकृत पतों पर अनुपस्थित पाए गए. जबकि 3.1 करोड़ नाम वाले लोग स्थायी रूप से राज्य से बाहर स्थानांतरित हो गए. अन्य कारणों से 12.7 लाख नाम हटाए गए. मतदाता सूची में विशिष्ट शुद्धिकरण के बाद, अब इन 12 प्रदेशों में 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं. इनमें 6.5 करोड़ से अधिक ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम सूची में थे लेकिन उन्होंने मतदान किया ही नहीं किया था. अब उनके नाम बरकरार रहने से फर्जी वोट डलने की आशंका थी. लिहाजा उन्हें हटाने से एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची तैयार हुई है.

कहां और कितने नाम हटाए और जोड़े गए 
पश्चिम बंगाल में 10.9 फीसद, तमिलनाडु में 10.6 फीसद और गोवा में 10.2 फीसद नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 7% की शुद्ध गिरावट देखी गई. अंडमान और निकोबार में 16.6% के साथ ये दर सबसे अधिक थी. इसके बाद छत्तीसगढ़ में 11.3%, उत्तर प्रदेश में 13.2%, गुजरात में 13.1% और पश्चिम बंगाल 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पांचवें स्थान पर रहा. बंगाल की मतदाता सूची से हटाए गए 27.1 लाख लोगों के अलावा, अन्य 6 लाख लोगों को सूची में उनके शामिल होने पर आपत्तियों के आधार पर हटाया गया. 

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और गोवा में क्रमशः 20.9%, 10% और 10.2% मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई, जबकि पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 1% की शुद्ध गिरावट देखी गई. मध्य प्रदेश में 5.7, राजस्थान में 5.4, केरल में 2.5 और लक्षद्वीप में 0.3% मतदाताओं की संख्या में कमी आई. 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची में जोड़े गए 2 करोड़ नामों में से उत्तर प्रदेश 92.4 लाख नाम जोड़ कर अव्वल रहा. उसके बाद राजस्थान में 15.4 लाख, तमिलनाडु में 35 लाख, केरल में 20.4 लाख, राजस्थान में 15.4 लाख, मध्य प्रदेश में 12.9 लाख और गुजरात में 12 लाख 10 हजार से ज़्यादा मतदाता जोड़े गए.

 

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