सूरत के रांदेर इलाके में इस बार गणेश उत्सव के दौरान एक अनोखी और सामाजिक संदेश देने वाली थीम पर गणेश पंडाल तैयार किया गया है. आमतौर पर गणेश पंडालों में धार्मिक और पौराणिक झांकियां देखने को मिलती हैं, लेकिन इस पंडाल में भगवान गणेश के दर्शन के साथ-साथ ऑर्गन डोनेशन को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. पंडाल की पूरी सजावट और झांकी का मकसद लोगों को यह समझाना है कि अंगदान के जरिए किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दिया जा सकता है.
पंडाल के बाहर ही मानव शरीर के अलग-अलग अंगों को सांकेतिक रूप से प्रदर्शित किया गया है. इन अंगों के जरिए लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मृत्यु के बाद भी इंसान के अंग से किसी दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाया जा सकता है.
पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं को शुरुआत से ही अंगदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है. पंडाल के अंदर प्रवेश करते ही ऑर्गन डोनेशन को लेकर अलग-अलग जानकारी प्रदर्शित की गई है. यहां बताया गया है कि ब्रेन डेड व्यक्ति के कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं और प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में किन अंगों का दान संभव हो सकता है. साथ ही अंगदान की प्रक्रिया और इसके महत्व को भी सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है.
इस पंडाल में सूरत की डोनेट लाइफ संस्था और वास्तु ग्रुप द्वारा अंगदान को लेकर किए जाने वाले कार्यों को भी दर्शाया गया है. थीम के माध्यम से बताया गया है कि संस्था की टीम परिवार के संपर्क में पहुंचती है. साथ ही कैसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक अंगों को कम से कम समय में पहुंचाने के लिए किस तरह पुलिस, एंबुलेंस और अन्य परिवहन व्यवस्थाओं के सहयोग से रास्ता तैयार किया जाता है, इसे झांकी के माध्यम से समझाया गया है.
अंगदान की पूरी थीम के बाद श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. गणेश प्रतिमा के पास भी एक विशेष संदेश लगाया गया है, जिसमें भगवान गणेश की पौराणिक कथा को अंग प्रत्यारोपण की अवधारणा से जोड़ा गया है.
पंडाल में प्रदर्शित संदेश के अनुसार, जब भगवान शिव के क्रोध के कारण भगवान गणेश का सिर अलग हुआ, तब बाद में उनके शरीर पर हाथी का सिर लगाया गया और भगवान गणेश को नया जीवन मिला. इसी पौराणिक प्रसंग को प्रतीकात्मक रूप से अंग प्रत्यारोपण के संदेश से जोड़ा गया है.