Advertisement

'क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए', जंक फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने जंक फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने कहा कि अगर संघ इसे स्वयं करता है, तो अच्छी बात है, अन्यथा हम आगे के लिए निर्देश जारी करेंगे. हमें संघ की वो दलीलें मंजूर नहीं हैं, जिनमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानकों के बराबर होना संभव नहीं है.

Supreme Court
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:43 PM IST

बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या पिछले 20 साल में पांच गुना तक बढ़ गई है. सन 2000 से 2022 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर 2% से बढ़कर 10% हो गई है. इस बाबत दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता है. केंद्र को जंक फूड के पैकेट पर सामने की ओर ही चेतावनी लेबल लगाने के अपने आदेश को लागू करने का अल्टीमेटम भेजा है.

'क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए'
कोर्ट ने कहा है कि अगर संघ इसे स्वयं करता है, तो अच्छी बात है, अन्यथा हम आगे के लिए निर्देश जारी करेंगे. हमें संघ की वो दलीलें मंजूर नहीं हैं, जिनमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानकों के बराबर होना संभव नहीं है. इस दलील के मुताबिक तो क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए?

जस्टिस जे बी पारदीवाला ने कहा कि यही वह प्रश्न है, जिसे हम केंद्र के विचारार्थ रख रहे हैं. जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने आदेश में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार से जोड़ा है.

3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी ने दायर की है याचिका-
यह आदेश गैर सरकारी संगठन '3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में आया है. याचिकाकर्ता के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने अपनी दलीलों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कई साल बीत गए. इतने समय में सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया, जबकि दशा बिगड़ती जा रही है.

यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब सरकार जंक फूड उत्पादों पर पैकेट के सामने चेतावनी लेबल लगाने में अनिच्छुक दिख रही है.

सेहत के लिए जोखिम पैदा करते हैं अधि नमक और चीनी- SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिक नमक, चीनी, संतृप्त वसा और कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद करने के लिए स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक है.

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत के अति-प्रसंस्कृत खाद्य बाजार में 2009 और 2023 के बीच 150% से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि मोटापे में कथित तौर पर पांच गुना तक वृद्धि देखी गई है.

ये भी पढ़ें:

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement