The Sepoy Mutiny: मेरठ से शुरू हुआ था भारत की आजादी का पहला विद्रोह, हिल गई थीं ब्रिटिश सरकार की नींव

साल 1857 में 10 मई को भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह किया जो भविष्य में जाकर अंग्रेजों के पतन का कारण बना.

The Sepoy Mutiny (Photo: Wikipedia)
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 10 मई 2023,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

भारत की आजादी के लिए बहुत से लोगों ने कुर्बानी दी और तब जाकर आज हम खुद को स्वतंत्र कहते हैं. अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों के संघर्ष का इतिहास बहुत विशाल है. समय-समय पर भारत की आजादी के लिए आंदोलन और युद्ध हुए जिनकी बदौलत देश को स्वतंत्रता मिली. लेकिन इस संघर्ष का पहला विद्रोह शुरू हुआ 10 मई, 1857 को. जिसे 1857 के भारतीय विद्रोह के नाम से जाना जाता है. 

इसे भारतीय स्वतंत्रता के पहले युद्ध के रूप में भी जाना जाता है. इसकी शुरुआत मेरठ में भारतीय सिपाहियों के विद्रोह के साथ हुआ और यहीं से भारतीय इतिहास की राह बदल गई. भले ही यह विद्रोह अंग्रेजों ने दबा दिया था लेकिन इस विद्रोह ने आंग्रेजी शासन की लींव को हिलाकर देश की आजादी की नींव रख दी थी. 

भारतीय सिपाहियों ने की शुरुआत
स्वतंत्रता के विद्रोह को प्रज्वलित करने वाली चिंगारी मेरठ में सिपाहियों ने फूंकी थी. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भारतीय सैनिक, या सिपाही, कई कारणों से अपने ब्रिटिश अधिकारियों से असंतुष्ट हो गए. इनमें नस्लीय भेदभाव, कम वेतन, उन्नति के सीमित अवसर, और यह धारणा शामिल थी कि ब्रिटिश सक्रिय रूप से भारतीय संस्कृति और धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे. 

ऐसे में, भारतीय सैनिकों में खबर फैल गई कि अंग्रेजों की नई एनफील्ड राइफल के कारतूस गाय और सुअर की चर्बी से बने हैं. यह हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों के लिए अपमानजनक था. मेरठ में सिपाहियों ने 10 मई, 1857 को खुले विद्रोह में भाग लिया और अपने ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या कर दी और अपने साथी सैनिकों को जेल से मुक्त कर दिया. यह विद्रोह पूरे उत्तरी और मध्य भारत में जंगल की आग की तरह फैल गया, दिल्ली, कानपुर और लखनऊ जैसे शहर विद्रोह के केंद्र बन गए. यह संघर्ष एक साल से अधिक समय तक चला, और इसमें हजारों लोगों की जान चली गई. 

रखी देश की स्वतंत्रता की नींव 
हालांकि, अंग्रेजों ने 1858 में विद्रोह को दबा दिया. लेकिन ब्रिटिश सरकार ने, अपने भारतीय क्षेत्रों के प्रबंधन में ईस्ट इंडिया कंपनी की विफलता को पहचानते हुए, कंपनी को भंग कर दिया. यह विद्रोह भले ही शांत हो गया लेकिन भारतीयों के दिल में चिंगारी भर गया. इस विद्रोह ने भारतीयों को विश्वा दिया कि वे अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ लड़ सकते हैं. उन्हें जरूरत थी तो बस साथ मिलकर लड़ने की. 

1857 की लड़ाई अंग्रेजों के पतन का कारण सिद्ध हुई. इसके बाद समय-समय पर आंदोलन और युद्ध होने लगे जिससे अंग्रेजों के लिए शासन बनाए रखना मुश्किल हो गया. और 90 साल बाद 1947 में देश को आजादी मिल गई. लेकिन यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन स्वतंत्रता सेनानियों को हमेशा याद रखें जिनकी वजह से आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं. 
 

 

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