Advertisement

तिब्बती एक्टिविस्ट का 127 दिन में 20 हजार किमी का सफर, बॉर्डर इलाके के खोले कई रहस्य

तिब्बती स्वतंत्रता कार्यकर्ता और लेखक तेनजिन त्सुंदू (Tenzin Tsundue)ने 127 दिनों में और लगभग हिमालयी राज्यों की 20,000 किमी की दूरी तय की.

तिब्बती एक्टिविस्ट तेनजिन त्सुंदू
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST
  • तेनजिन त्सुंदू ने किए बॉर्डर इलाके के रहस्य उजागर
  • हिमालयी राज्यों में की 20,000 किमी की दूरी तय

तिब्बती स्वतंत्रता कार्यकर्ता और लेखक तेनजिन त्सुंदू (Tenzin Tsundue) ने तिब्बत में चीनी कब्जे के 70 वर्षों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक केंद्र शासित प्रदेश और चार हिमालयी राज्यों की यात्रा करते हुए अपनी महाकाव्य यात्रा पूरी कर ली है. इस दौरान उन्होंने भारत के लिए सुरक्षा खतरे के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी आग्रह किया.  

तेनजिन त्सुंदू 14 अगस्त को 'हिमालय की सैर' अभियान के लिए धर्मशाला से निकले थे. उन्होंने लेह से अपनी यात्रा शुरू की थी. स्थानीय परिवहन का उपयोग करके हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल की यात्रा की और बुधवार को धर्मशाला लौटने से पहले ज्यादातर गांवों के दूरदराज के खानाबदोश क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों से गुजरे. 

127 दिनों में तय की 20 हजार की दूरी

46 वर्षीय कार्यकर्ता ने कहा कि इस यात्रा के दौरान, 127 दिनों में और लगभग 20,000 किमी की दूरी तय करते हुए, उन्होंने महसूस किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों को चीन की विस्तारवादी नीतियों और सीमाओं के पार इसकी वर्तमान गतिविधियों के बारे में बहुत कम या कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, "वे 2020 में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच गलवान घाटी संघर्ष से स्तब्ध रह गए थे, जिसमें 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे. 

कार्यकर्ता अपने साथ एक प्रोजेक्टर, साउंड बॉक्स और बेडशीट स्क्रीन लेकर आए थे, जिसका इस्तेमाल वह लगभग 100 बार फिल्म 'एस्केप ऑफ द दलाई लामा' की स्क्रीनिंग के लिए करते थे. "यह फिल्म तिब्बत पर चीनी कब्जे और हिमालय की सीमाओं पर चीनी सैन्य दबाव की व्याख्या करती है," उन्होंने कहा.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement