Explainer:  वकील की भारी फीस से हैं परेशान? कोर्ट में खुद लड़ सकते हैं अपना केस, डिग्री भी जरूरी नहीं 

व्यक्ति अपने मुकदमे के लिए अदालत में अपना केस लड़ सकता है, वह बहस कर सकता है. लेकिन वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए वकालत नहीं कर सकता इसके लिए वकील ही चाहिए होगा.

Indian Courts
अपूर्वा सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2022,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST
  • दूसरों के केस नहीं लड़ सकते हैं 
  • सुब्रमण्यम स्वामी खुद लड़ते हैं अपना केस 

“मेरा केस भला मुझसे अच्छा कौन जानता होगा? तो फिर अपना केस खुद ही लड़ लीजिए”... नहीं ये कोई टॉन्ट नहीं है. आप अपना केस खुद लड़ सकते हैं. जी हां, संविधान ने इसका अधिकार आपको दिया है. जब भी कोई व्यक्ति किसी सिविल या आपराधिक मामले में घिर जाता है तब उसे भारी फीस चुकानी पड़ती है. कई बार फीस इतनी महंगी होती है कि आप उसे देने में असमर्थ होते हैं. लेकिन संविधान में आपको इसका विकल्प भी दिया गया है. धारा 32 के मुताबिक, बिन वकील भी केस लड़ा सकता है. आप खुद अपना केस लड़ सकते हैं. हालांकि, इसके लिए आपको जज से अनुमति लेने पड़ती है. 

क्या कहता है एडवोकेट्स एक्ट, 1961?

आपको बताते चलें कि संविधान के सेक्शन 32 के एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के मुताबिक, कोई भी अदालत में अपना केस लड़ सकता है. जज इसके लिए किसी भी व्यक्ति को अपने सामने उपस्थित होने की इजाजत दे सकती है,  फिर चाहे वो वकील हो या नहीं. इसके लिए आपको किसी तरह की लॉ की डिग्री लेने की जरूरत भी नहीं है. संविधान ने हर किसी को खुद के मामले में रक्षा करने का वैधानिक अधिकार दिया हुआ है. 

क्या होती है प्रक्रिया?

 दरअसल, इसके लिए आपको जज से परमिशन लेनी जरूरी है. आप परमिशन लेने के बाद खुद के केस में पैरवी कर सकते हैं. हालांकि, जज आपको वकील नियुक्त करने का परामर्श दे सकते हैं. इसके लिए आप अपना पक्ष रख सकते हैं और कागजी कार्यवाही करने के लिए और खुद को अपना केस रिप्रेजेंट करने के लिए उचित समय मांग सकते हैं. 

दूसरों के केस नहीं लड़ सकते हैं 

एक और बात इस नियम में कुछ अपवाद भी हैं.  पावर ऑफ़ अटॉर्नी (Power of Attorney) के हिसाब से व्यक्ति व्यक्तिगत मुकदमे के लिए अदालत में अपना केस लड़ सकता है, वह बहस कर सकता है. लेकिन वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए वकालत नहीं कर सकता. हालांकि, अपना केस लड़ने के लिए भी आपको कानून, प्रक्रियाओं और अदालत के नियमों का भी ज्ञान होना चाहिए, ताकि आप अपना केस न हारें. 

सुब्रमण्यम स्वामी खुद लड़ते हैं अपना केस 

आप सुब्रमण्यम स्वामी को जानते ही होंगे. इन्होंने वकील न होते हुये भी कई बार अदालतों में अपना केस खुद ही लड़ा है. आपको बता दें, इन्होंने वकालत नहीं पढ़ी है. लेकिन फिर भी इन्हें कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, दिवंगत राम जेठमलानी जैसे वकीलों से बहस करते हुए देखा गया है. हालांकि, ज्यादातर मामलों में उनकी पत्नी  रॉक्सना स्वामी जो खुद एक एडवोकेट हैं या उनकी लीगल टीम उनका प्रतिनिधित्व करती है.

हालांकि, सलाह यही दी जाती है कि बिना वकील के अपना मुकदमा खुद लड़ना थोड़ा सा मुश्किल हो सकता है. इसलिए लोगों को बिना जोखिम उठाए किसी वकील को नियुक्त करना चाहिए ताकि वो बेहतर तरीके से आपके मुकदमे में ठीक से और उचित पैरवी कर सके.


 

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