दुनिया में आज पहले से कहीं ज्यादा भोजन पैदा हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) की हाल ही में जारी State of Food Security and Nutrition in the World 2026 (SOFI 2026) रिपोर्ट बताती है कि खाद्य संकट भोजन की उपलब्धता के साथ ही उसकी पहुंच और अफोर्डेबिलिटी का भी है. यानी खाना बाजार में मौजूद है, लेकिन करोड़ों लोगों की थाली तक पौष्टिक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है.
SOFI 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में दुनिया के करीब 64.5 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे थे. हालांकि रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत भी मिला है कि भूख झेलने वाले लोगों की संख्या 2024 के मुकाबले करीब 1.4 करोड़ और 2022 के उच्च स्तर के मुकाबले करीब 4.3 करोड़ कम हुई है. इसके बावजूद दुनिया की लगभग 7.8 फीसदी आबादी अभी भी भूख का सामना कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक भूख की व्यापकता के मामले में अफ्रीका अब एशिया से आगे निकल गया है. अफ्रीका में करीब 30.9 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 20 फीसदी है. इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा की चुनौतियां अभी भी गंभीर बनी हुई हैं.
रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता पौष्टिक भोजन की बढ़ती कीमतों को लेकर है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2025 में दुनिया के करीब 269 करोड़ लोग स्वस्थ और संतुलित भोजन खरीदने में सक्षम नहीं थे. यह दुनिया की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. SOFI 2026 रिपोर्ट बताती है कि 2017 के बाद पौष्टिक भोजन की लागत में करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 2017 में एक स्वस्थ आहार की औसत वैश्विक लागत 2.94 पीपीपी डॉलर प्रतिदिन थी, जो 2025 में बढ़कर 4.28 पीपीपी डॉलर प्रतिदिन पहुंच गई. यानी केवल आठ साल में स्वस्थ भोजन की कीमत में करीब 45.6 फीसदी का इजाफा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों में लोग पेट भरने लायक भोजन तो खरीद पा रहे हैं, लेकिन फल, सब्जियां, दालें, दूध, अंडे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ उनकी पहुंच से दूर होते जा रहे हैं.
रिपोर्ट और इससे जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाद्य सुरक्षा पर कई वैश्विक संकट एक साथ असर डाल रहे हैं. इनमें जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार विवाद, उर्वरक सप्लाई में रुकावट और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं. International Panel of Experts on Sustainable Food Systems (IPES-Food) के अनुसार चरम मौसम की घटनाएं खेती की लागत बढ़ा रही हैं और उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. इसका सीधा असर खाद्य कीमतों पर पड़ रहा है. खाद्य नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इन सब समस्याओं से आने वाले समय में खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
हालांकि SOFI 2026 रिपोर्ट में भारत का अलग से विश्लेषण नहीं किया गया है, लेकिन इसके निष्कर्ष भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. देश पहले से ही अनियमित मानसून, बढ़ती गर्मी, बाढ़, सूखे और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता का असर खेती, उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ता है, जिसका सीधा प्रभाव आम लोगों की थाली पर दिखाई देता है. ऐसे में खाद्य सुरक्षा का सवाल सिर्फ कृषि का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, जलवायु और सामाजिक नीतियों से भी जुड़ जाता है.
SOFI 2026 रिपोर्ट एक असहज सवाल छोड़ती है. जब दुनिया पहले से कहीं ज्यादा भोजन पैदा कर रही है, तो फिर करोड़ों लोग भूखे क्यों हैं और हर तीसरा व्यक्ति पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम क्यों नहीं है? रिपोर्ट के मुताबिक इसका जवाब सिर्फ उत्पादन में नहीं, बल्कि आय, कीमतों, वितरण व्यवस्था, जलवायु संकट और नीतिगत चुनौतियों में छिपा है. यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा कृषि के साथ साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है. दूसरे शब्दों में कहें तो दुनिया में भोजन की कमी नहीं है, लेकिन पौष्टिक भोजन तक समान पहुंच आज भी करोड़ों लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.