वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज (1 फरवरी) लगातार अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि देश को हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में सरकार बड़े कदम उठाने की तैयारी में है. मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के सहयोग से मेडिकल हब विकसित किए जाएंगे, जिनमें आयुष (AYUSH) केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे.
1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग
इसके साथ ही आने वाले साल में 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को पूरा किया जा सके. सरकार एक नई योजना पर विचार कर रही है, जिसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से राज्यों में आधुनिक मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे. इन हब्स का मकसद भारत को सस्ती और बेहतर इलाज सेवाओं के कारण विदेशी मरीजों के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाना है.
देशभर में 5 रीजनल मेडिकल टूरिज्म हब
योजना के तहत देशभर में 5 क्षेत्रीय (रीजनल) मेडिकल टूरिज्म हब बनाए जाएंगे, जिससे हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा. मेडिकल सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स तैयार करने पर जोर दिया गया है. इसके लिए NSQF (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क) के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे. साथ ही, हेल्थ सेक्टर से जुड़े पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए एलाइड हेल्थ इंस्टीट्यूट्स को अपग्रेड करने की योजना है.
सर्विस सेक्टर के लिए खास पैनल बनाया जाएगा
तेजी से बदलती तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सर्विस सेक्टर के लिए एक विशेष पैनल गठित किया जाएगा. यह पैनल उभरती तकनीकों का नौकरियों पर पड़ने वाले असर का आकलन करेगा और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से स्किल डेवलपमेंट की रणनीति सुझाएगा.
2047 तक वैश्विक सर्विस सेक्टर में भारत की हिस्सेदारी 10% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल टूरिज्म, स्किल्ड मैनपावर और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं पर फोकस से यह लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.