Magh Mela: माघ मेले में दिखे अनोखे हनुमान भक्त, केसरिया हेलमेट पर बना राम मंदिर.. स्कूटी पर लेकर चलते हैं गदा

65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान जी, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं.

स्वामी जी की खास स्कूटी
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

प्रयागराज संगम की रीत पर लगने वाले माघ मेले में साधु-संतों के रूप के अलावा कई ऐसे चेहरे भी दिखते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित कर दिया है. इन्हीं में से एक हैं 65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज. वे स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान जी, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं. हनुमान जी से उनका विशेष लगाव है.

क्या कहते है स्वामी?
वह बताते हैं कि मैं विवेकानंद आश्रम का सन्यासी हूं. आश्रम आने से पहले भी बचपन से ही हनुमान जी का भक्त रहा हूं. केसरिया हेलमेट के बारे में उन्होंने बताया कि मुझे केसरिया हेलमेट चाहिए था. लेकिन मिल पाना काफी मुश्किल हो रहा था. पहले ब्राउन कलर का हेलमेट था, लेकिन नया केसरिया हेलमेट जब देखा तो काफी खुशी हुई. इसमें हनुमान जी, राम जी, अयोध्या राम मंदिर और झंडियां सब लगी हैं.

 
 
गौतम बुद्ध से हैं प्रेरित
जमींदार परिवार से सन्यास: स्वामी राममोहन महाराज जमींदार परिवार के बड़े बेटे हैं. वे बताते हैं कि मैंने बीए में हिंदी ऑनर्स पढ़ते समय गौतम बुद्ध जी को पढ़ा. उनके जीवन से प्रेरित होकर साधु जीवन जीनने की इच्छा हुई. साधु बनकर मनुष्य जीवन का लक्ष्य प्राप्त करना मेरा उद्देश्य है. पढ़ाई के बाद विवेकानंद आश्रम चला गया. आश्रम अविवाहित और 26 वर्ष तक के युवाओं को ही लेता है. गौतम बुद्ध राजकुमार थे, उनके पास पत्नी-बच्चे थे, फिर भी त्याग किया. मैं तो अविवाहित था. 

वह बताते हैं कि आश्रम की दिनचर्या में सुबह 5 बजे पूजा शुरू होती है, जो 9 से 10 बजे तक चलती है. शाम 6:30 बजे आरती होती है. स्वामी राममोहन महाराज का यह अनोखा रूप माघ मेला की भक्ति यात्रा को और जीवंत बनाता है.

- आनंद राज की रिपोर्ट

 

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