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UP Government ODOC Scheme: यूपी सरकार की पहल! वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को देश सहित विदेश में दिला रही पहचान और बढ़ावा

उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन योजना जिला-स्तरीय पारंपरिक व्यंजनों की पहचान करके उन्हें गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच से जोड़ रही है. सरकार ने इस पहल को एक ऐसे जरिए के तौर पर बताया है, जिसके माध्यम से लोकल व्यंजन क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल कर सकते हैं.

Traditional Dishes of UP
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खान-पान की परंपराएं काफी अलग-अलग हैं. लोकल डिशेज व फूड प्रोडक्ट्स इन इलाकों की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं. यूपी की बीजेपी सरकार ने इन जिला-स्तरीय खान-पान की परंपराओं की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक ढांचा तैयार करने के मकसद से वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन (ODOC) योजना शुरू की है. यह योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम से अलग है, जो हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और अन्य उद्योगों समेत अलग-अलग सेक्टरों में जिला-स्तरीय उत्पादों पर केंद्रित है.

क्या है वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन?
वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन (ODOC) योजना को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 जनवरी 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर लॉन्च किया था. इस योजना के तहत, उत्तर प्रदेश के जिलों से जुड़े पारंपरिक व्यंजनों की पहचान की जाएगी और उन्हें गुणवत्ता में सुधार, ब्रांडिंग और मार्केट एक्सेस से जोड़ा जाएगा. इसका मकसद है कि लोकल फूड परंपराओं को उनके मौजूदा भौगोलिक बाजार से आगे बढ़कर और ज्यादा पहचान मिले. सरकार ने इस पहल को एक ऐसे जरिए के तौर पर बताया है, जिसके जरिए लोकल व्यंजन का स्वाद क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल कर सकते हैं.  हालांकि यह अभी योजना का लक्ष्य है. इसका मतलब यह नहीं कि यह बाजार विस्तार पहले ही हो चुका है.

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को करना है कवर 
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, और ODOC को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर जिले से जुड़े खास पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जा सके. जिला-वार की गई इस कवायद में राज्यभर से 208 पारंपरिक व्यंजनों की पहचान की गई है.  कुछ जिलों के लिए इस लिस्ट में एक से ज्यादा डिश शामिल हैं, इसलिए 208 का यह आंकड़ा यह नहीं दिखाता कि हर एक जिले के लिए सिर्फ एक ही डिश चुनी गई है. पहचाने गए इन खाद्य पदार्थों में तरह-तरह की पारंपरिक तैयारियां और स्थानीय खासियतें शामिल हैं. यह पहल हर जिले के खान-पान को एक जैसा, अकेला उत्पाद मानने के बजाय, पाक-पहचान को लेकर एक व्यापक नजरिया अपनाती है.

गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर फोकस
सरकार की घोषणा के मुताबिक, ODOC पारंपरिक व्यंजनों की पहचान को गुणवत्ता में सुधार, ब्रांडिंग और मार्केट एक्सेस से जोड़ती है. इसका मतलब है कि यह योजना सिर्फ पारंपरिक व्यंजनों की एक लिस्ट बनाने तक सीमित नहीं है. इसके तहत बताए गए ढांचे में यह भी शामिल है कि इन खाद्य पदार्थों को कैसे बेहतर तरीके से पेश किया जाए और बड़े बाजारों तक कैसे पहुंचाया जाए. हालांकि, इस योजना को यह गारंटी देने वाली नहीं माना जाना चाहिए कि किसी पहचाने गए व्यंजन से जुड़े हर फूड बिजनेस को व्यावसायिक सफलता मिलेगी ही. बाजार की मांग, उत्पादन क्षमता, फूड-सेफ्टी नियमों का पालन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और डिस्ट्रिब्यूशन जैसे कारक ही यह तय करते रहेंगे कि कोई एक उत्पाद या बिजनेस आगे बढ़ पाता है या नहीं.

2026-27 के बजट में नई योजना
ODOC, उत्तर प्रदेश सरकार के 2026-27 के बजट में शामिल एक नई योजना है. राज्य के बजट दस्तावेजों में इस वित्तीय वर्ष के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजिन योजना के लिए 75 करोड़ रुपए रखे गए हैं. यह 75 करोड़ रुपए का आंकड़ा योजना को लागू करने के लिए बजट में की गई व्यवस्था है. जब तक कोई खास लाभार्थी दिशा-निर्देश यह तय न करें, तब तक इसे किसी व्यक्तिगत फूड बिजनेस के लिए उपलब्ध सब्सिडी या सीधी वित्तीय सहायता की रकम नहीं समझा जाना चाहिए.

लोकल खाने से बड़े बाजारों तक
ODOC के बताए गए मकसदों में से एक है जिला-स्तरीय पारंपरिक व्यंजनों को मार्केट एक्सेस और ब्रांडिंग से जोड़ना. सरकार ने इस पहल को उत्तर प्रदेश की खाद्य विरासत के व्यापक प्रचार से भी जोड़ा है. लोकल फूड उत्पादकों और बिजनेस के लिए, बेहतर ब्रांडिंग और मार्केट एक्सेस से यह मौका मिल सकता है कि वे अपने पारंपरिक खाद्य पदार्थों को मौजूदा बाजार से आगे, नए उपभोक्ताओं तक पेश कर सकें. हालांकि, असल व्यावसायिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग उत्पादों को कैसे विकसित, मानकीकृत, मार्केट और डिस्ट्रिब्यूट किया जाता है.

यह फर्क समझना जरूरी 
ODOC क्षेत्रीय व्यंजनों की पहचान और प्रचार के लिए एक सरकारी ढांचा तैयार करती है. यह अपने आप में हर उत्पादक के लिए बढ़ी हुई आमदनी, निर्यात या बाजार विस्तार की गारंटी नहीं देती.

उत्तर प्रदेश की पाक-पहचान को दर्ज करना
ODOC, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े पारंपरिक खाने को दर्ज करने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक ढांचा तैयार करती है. इसे लागू करने का तरीका मुख्य रूप से लोकल व्यंजनों की पहचान करने और उन्हें गुणवत्ता में सुधार, ब्रांडिंग और मार्केट एक्सेस से जोड़ने पर केंद्रित है. जनवरी 2026 में लॉन्च हुई यह योजना, राज्य की जिला-केंद्रित आर्थिक और सांस्कृतिक पहलों में एक नया जुड़ाव है. फूड बिजनेस, कलिनरी टूरिज्म और मार्केट एक्सेस पर इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह योजना किस तरह लागू होती है और पहचाने गए व्यंजनों को कितने प्रभावी ढंग से विकसित और प्रमोट किया जाता है.


 

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