उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय राय (Ajay Rai) को उनके पद से हटाकर ये जिम्मेदारी विधायक आराधना मिश्रा को सौंप दी गई है. इसपर अजय राय ने प्रतिक्रिया देते हुए खास बातचीत में बताया कि यह पार्टी का निर्णय है और समय-समय पर परिवर्तन और बदलाव होता रहता है. हम लोग पार्टी के सिपाही हैं. दिन-रात काम कर रहे हैं. पार्टी को मजबूत करना और राहुल गांधी को ताकत देने का काम करते हैं. किस तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) खत्म हो, जिसने देश को बर्बाद कर रखा है. हम इस पर काम कर रहे हैं. बीजेपी राज में न शिक्षा न स्वास्थ्य न नौकरी न काम है. हम लोग इसी पर काम कर रहे हैं और 2027 में सरकार बनाने पर भी काम कर रहे हैं.
जितनी जिम्मेदारियां मिली उसे बखूबी निभाया
खुद को हटाए जाने के पीछे के कारण के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है और पार्टी का दिया गया निर्णय हम सर माथे लगाते हैं. किसी और बड़ी जिम्मेदारी के मिलने या फिर राष्ट्रीय नेतृत्व में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पार्टी का फैसला होगा. अभी तक जितनी जिम्मेदारियां मिली मेरी ओर से उसे बखूबी निभाया गया. टारगेट एक ही है भाजपा को हराना और मोदी को भगाना.
आराधना मिश्रा के बारे में कही यह बात
नवनियुक्त यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा के अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी से अच्छे संबंध और उत्तर प्रदेश में उनकी जाति के लोगों तक अच्छा संदेश पहुंचाने के कयास के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि जो उन्हें जिम्मेदारी मिली है, वे उसका निर्वहन करेंगी. निश्चित रूप से वह बहुत ही समझदार और काम करने वाली महिला हैं. उनको हम सभी का पूरा समर्थन और सहयोग है.
डंके की चोट पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी
वाराणसी के पिंडरा विधानसभा से चुनाव लड़ने की घोषणा के सवाल पर अजय राय ने एक बार फिर दोहराया कि पिंडरा विधानसभा उनका घर है और परिवार भी है. वहीं से राजनीतिक जन्म भी हुआ है. मरते दम तक वहां से संबंध रहेगा और निश्चित तौर पर डंके की चोट पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी.
आपको मालूम हो कि अजय राय पहले भाजपा से जुड़े थे. वह वाराणसी की पूर्व की कोलसला विधानसभा सीट से नौ बार विधायक रहे उदल को 1996 में हराकर भाजपा के विधायक बने थे. वह 2002 और 2007 में भी भाजपा से विधायक चुने गए थे. भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से डॉ. मुरली मनोहर जोशी को मैदान में उतारा तो अजय राय ने इसका विरोध करते हुए पार्टी छोड़ दी थी. उनके खिलाफ चुनावी मैदान में कूद पड़े. हालांकि अजय राय जीते तो नहीं लेकिन सदस्यता जाने के बाद 2009 में हुए उप चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर विधायक बन गए. 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. अजय राय लोकसभा चुनाव 2014, 2019, और 2024 में मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.