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कांग्रेस-सपा पार्टी गठबंधन में क्या सब कुछ ठीक-ठाक है? क्यों दोनों पार्टियों सभी सीटों की तैयारी में जुटी हैं!

कांग्रेस पार्टी के नेता और पार्टी के मुस्लिम चेहरे इमरान मसूद अक्टूबर तक हर हाल में गठबंधन में सीटों की संख्या और सीटों के नाम तय कर लेना चाहते हैं इमरान मसूद ने कहा कि अगर गठबंधन में देरी हुई तो कांग्रेस अपनी बढ़त खो देगी.

SP-Congress Alliance
कुमार अभिषेक
  • लखनऊ,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST
  • क्या सपा-कांग्रेस गठबंधन में सब कुछ सामान्य है?
  • सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों में अलग-अलग रणनीति

2027 उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे. इसका एलान दोनों पार्टियां पहले ही कर चुकी है, अखिलेश यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव में जाएंगे. कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी यही मानता है कि एक साथ जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

मायावती पहले ही कांग्रेस या समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को खारिज कर चुकी हैं जबकि असदुद्दीन ओवैसी लगातार अखिलेश यादव से गठबंधन की गुहार लगा रहे हैं. आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद रावण भी गठबंधन को लेकर ओपन है लेकिन गठबंधन में जाएंगे या नहीं इस पर अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं.

क्या सपा-कांग्रेस गठबंधन में सब कुछ सामान्य है?
खैर पूरी चर्चा सिमटती है कि क्या कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन में सब कुछ सामान्य है !क्या दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग आसानी से हो जाएगा या फिर कुछ ऐसा पेंच इस गठबंधन में फंस रहा है जिससे यह गठबंधन अभी भी अधर में झूल रहा है.

कांग्रेस में दूसरे दलों से गठबंधन की भी चर्चा
कांग्रेस पार्टी का एक वर्ग मायावती या चंद्रशेखर रावण पार्टी के साथ गठबंधन का इच्छुक है. माना जाना है राहुल गांधी अखिलेश यादव के साथ ही गठबंधन में जाने का तय कर चुके हैं इसलिए दूसरे दलों के लिए फिलहाल कोई दरवाजा नहीं खुला है. कांग्रेस का दावा है कि वह अखिलेश यादव के साथ भी गठबंधन में जाएगी तो अपनी शर्तों पर यदि इस बार अखिलेश यादव कांग्रेस की नहीं तय करेंगे बल्कि कांग्रेस खुद अपनी सीटें तय करेगी. समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों को लेकर बिल्कुल साफ है कि अगर गठबंधन में कोई पेंच फंसा तो सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है.

सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों में अलग-अलग रणनीति
कांग्रेस के भीतर जल्दबाजी का माहौल है. कांग्रेस गठबंधन तो करना चाहती है लेकिन जल्द से जल्द ताकि पार्टी को पता चल सके की कितने उम्मीदवार हैं और किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ना है, उधर समाजवादी पार्टी को सीट बंटवारे की कोई जल्दबाजी नहीं है. समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों के मुकम्मल होने के बाद सीटों के बंटवारे पर बात करना चाहती है जबकि कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अगर गठबंधन में सीटें फाइनल करने में देरी हुई तो फिर कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर ख़त्म हो जाएगी और तब अखिलेश यादव के दया पर ही गठबंधन करना पड़ेगा.

अक्टूबर तक सीटों पर फैसला चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के नेता और पार्टी के मुस्लिम चेहरे इमरान मसूद अक्टूबर तक हर हाल में गठबंधन में सीटों की संख्या और सीटों के नाम तय कर लेना चाहते हैं इमरान मसूद ने कहा कि अगर गठबंधन में देरी हुई तो कांग्रेस अपनी बढ़त खो देगी.

दोनों दल 403 सीटों पर तैयारी का दावा कर रहे
हालांकि दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर तैयारी के दावे कर रही है लेकिन सपा और कांग्रेस दोनों को मालूम है की सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की क्षमता दोनों में से किसी पार्टी की नहीं है. पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी कमजोर है तो बाकी पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का संगठन नहीं के बराबर है ऐसे में दोनों तरफ से दावे और प्रतिदावे हो रहे हैं लेकिन दोनों को मालूम है कि बगैर एक साथ आए दोनों में से किसी की दाल नहीं गलने वाली सभी अपनी-अपनी बारगेनिंग पावर को मजबूत रखकर गठबंधन की मेज पर बैठना चाहते हैं.

कांग्रेस ने 150 से ज्यादा सीटों की सूची देने का किया दावा
इमरान मसूद ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी ने डेढ़ सौ से ज्यादा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को सौंप दी है लेकिन समाजवादी पार्टी की तरफ से गठबंधन की बातचीत की कोई पुष्टि नहीं है.

औपचारिक बातचीत का अभी इंतजार
अभी तक अनौपचारिक तौर पर भले ही गठबंधन को लेकर कोई सुगबुगाहट शुरू हुई हो लेकिन औपचारिक तौर पर कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है समाजवादी पार्टी इसे चुनाव के ऐलान तक ले जाना चाहती है उधर कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता गठबंधन पर सब कुछ जल्द तय कर लेना चाहते हैं.

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