उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, सीतापुर और बहराइच के आसपास के इलाकों में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. करीब चार लाख क्यूसेक पानी और छोड़े जाने की आशंका से हालात और बिगड़ने का खतरा है. नदी किनारे बसे करीब 75 गांव बाढ़ और कटान की चपेट में हैं. कई जगहों पर लोगों के घरों और सड़कों तक पानी पहुंच गया है.
सरयू के कटान में बहा शिव मंदिर और टेलीफोन एक्सचेंज
बाराबंकी के सूरतगंज ब्लॉक के हेतमापुर में सरयू नदी का कटान बेहद तेज हो गया है. नदी के किनारे बना एक शिव मंदिर कटान की चपेट में आकर बह गया. इसके साथ ही सरकारी टेलीफोन एक्सचेंज का कार्यालय भी नदी में समा गया. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों इमारतें करीब 20 साल से यहां मौजूद थीं, लेकिन इतने साल बाद पहली बार बाढ़ का इतना भयावह असर देखने को मिल रहा है.
घर बचाना मुश्किल हुआ तो खुद तोड़ रहे मकान
सीतापुर और बाराबंकी बॉर्डर के रामनगर तहसील क्षेत्र में नदी का पानी आबादी के करीब पहुंच गया है. तेज धारा से पक्के मकानों के आसपास कटान हो रहा है. ऐसे में कई ग्रामीण अपने वर्षों पुराने मकानों को खुद तोड़ रहे हैं, ताकि ईंट और घर का सामान सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सके. जिस घर को बनाने में पूरी जिंदगी की कमाई लगी, उसे अपनी आंखों के सामने उजाड़ना ग्रामीणों के लिए बेहद दर्दनाक है.
प्रशासन राहत में जुटा, लेकिन कटान बड़ी चुनौती
बाढ़ खंड के अधिकारी बांस, कटर और बोरियों में ईंट भरकर कटान रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नदी की तेज धारा के सामने ये इंतजाम ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रहे हैं. कई गांवों में पानी पक्की सड़कों तक पहुंच गया है और ग्रामीणों के लिए बाइक निकालना भी मुश्किल हो गया है. प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं और पीड़ितों को राशन, सब्जियां और रोजमर्रा की जरूरत का सामान दिया जा रहा है. रामनगर की SDM आकांक्षा गुप्ता ने बताया कि इस इलाके में सबसे बड़ी समस्या कटान की है, जिससे कई घर घाघरा नदी में समा रहे हैं. प्रशासन राहत शिविरों के जरिए प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहा है.
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