यूपी के बस्ती जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक जिंदा बुजुर्ग व्यक्ति कफन पहनकर जिलाधिकारी दफ्तर में पहुंच गया और डीएम के चैंबर के सामने ही लेट गया.
14 साल से फाइलों में मृत घोषित
पीड़ित बुजुर्ग इशहाक अली का आरोप है कि वह पिछले 14 साल से सरकारी कागजों में मृत घोषित हैं, जबकि हकीकत में वह जिंदा हैं. उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, अपने जिंदा होने के सबूत भी दिए, लेकिन अब तक उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ. बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, 'साहब, मैं जिंदा हूं, लेकिन सरकारी कागजों में मर चुका हूं. अब आप ही मुझे जिंदा कर दीजिए.'
जमीन भी किसी और के नाम
इशहाक अली ने आरोप लगाया कि उन्हें मृत घोषित करने के बाद उनकी 0.770 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन भी गांव की एक महिला के नाम दर्ज कर दी गई. उनका कहना है कि जमीन ही उनकी पहचान है और उसे वापस पाने के लिए वह वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.
नौकरी करते रहे, फिर भी मृत
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इशहाक अली संतकबीर नगर के नाथनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वीपर के पद पर कार्यरत थे. रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को सेवानिवृत्ति ली और उन्हें सम्मान के साथ विदाई भी दी गई. लेकिन दूसरी ओर, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में उन्हें साल 2012 में ही मृत घोषित कर दिया गया था. यानी जिस दौरान विभाग उन्हें मृत मान रहा था, उसी समय स्वास्थ्य विभाग उन्हें वेतन भी दे रहा था.
अधिकारी पर गड़बड़ी का आरोप
पीड़ित ने आरोप लगाया कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ने पद का दुरुपयोग करते हुए 2 दिसंबर 2012 को कागजों में उनकी मौत दर्ज कर दी. इसके बाद उनकी जमीन को दूसरे के नाम ट्रांसफर कर दिया गया.
पेंशन मिल रही फिर भी मृत
इशहाक अली ने बताया कि उन्हें सरकार की ओर से पेंशन मिल रही है, जिससे वह अपना गुजारा कर रहे हैं. इसके बावजूद सरकारी फाइलों में उनकी पहचान एक मृत व्यक्ति के रूप में दर्ज है.
इस पूरे मामले पर उपजिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाठक ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है. उन्होंने बताया कि बुजुर्ग ने खुद को जीवित बताते हुए शिकायत की है, जिसकी जांच कराई जाएगी. दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा.
-संतोष कुमार सिंह की रिपोर्ट
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