किसको मिली यूपी पंचायत चुनाव के लिए OBC आयोग की कमान? 5 सदस्यों वाली टीम में कौन-कौन?

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्ग का कोटा तय करने के लिए समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है. यह आयोग पूरी तरह समर्पित पांच सदस्यीय टीम के साथ काम करेगा. इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को इस आयोग की कमान सौंपी गई है. उन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है.

Yogi Adityanath
gnttv.com
  • लखनऊ,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:08 PM IST

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर प्रदेश की योगी सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की राह साफ करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग का कोटा तय करने के लिए समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है. प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

आयोग की कमान किसको?
यह आयोग पूरी तरह समर्पित पांच सदस्यीय टीम के साथ काम करेगा. इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को इस आयोग की कमान सौंपी गई है. उन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. जस्टिस राम औतार सिंह के अलावा इस टीम में चार अन्य सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस (IAS) अफसर हैं. आयोग का मुख्य मुख्यालय राजधानी लखनऊ में बनाया गया है और यह जल्द ही अपना काम शुरू कर देगा.

आयोग में कौन-कौन शामिल है?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित आयोग में इन सदस्यों को शामिल किया गया है अध्यक्ष के रूप में जस्टिस राम औतार सिंह (रिटायर्ड) और सदस्यों में बृजेश कुमार (रिटायर्ड अपर जिला जज), संतोष कुमार विश्वकर्मा (रिटायर्ड अपर जिला जज), डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया (रिटायर्ड आईएएस), एसपी सिंह (रिटायर्ड IAS) है.

कौन है जस्टिस राम औतार सिंह?
अध्यक्ष बनाए गए जस्टिस राम औतार सिंह इससे पहले 2022-2023 में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भी समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं. बिजनौर के रहने वाले जस्टिस राम औतार ने तब प्रदेशभर में व्यापक सर्वे कर आंकड़े जुटाए थे, जिसके आधार पर ही निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू हुआ था.

यह नवगठित आयोग स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी का बारीकी से अध्ययन करेगा. इसके बाद आयोग आरक्षण की सीमा और उसके स्वरूप को लेकर अपनी फाइनल सिफारिशें सरकार को सौंपेगा. अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से 6 महीने का होगा.

(अंकित मिश्रा की रिपोर्ट)

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