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8 हजार रुपए लेकर किया ऑपरेशन, बाकी पैसे नहीं मिले तो फिर से तोड़ दी हड्डी; विधवा मां ने डीएम से लगाई गुहार

महिला के अनुसार, अस्पताल कर्मियों ने पहले ₹25,000 की मांग की थी. पैसे न देने पर डॉक्टरों ने उसकी 14 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी के पैर को गंभीर नुकसान पहुंचाया.

Muzaffarnagar news
gnttv.com
  • मुजफ्फरनगर,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक विधवा महिला ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. महिला अपनी 14 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई. महिला का आरोप है कि उसकी बेटी के पैर के ऑपरेशन के नाम पर पैसे मांगे गए और बाद में इलाज के दौरान लापरवाही कर उसकी हड्डी दोबारा तोड़ी गई.

मुफ्त इलाज के आदेश के बावजूद मांगे गए पैसे
पीड़िता रेशमा के अनुसार करीब डेढ़ महीने पहले उसकी बेटी के दाहिने पैर की हड्डी का ऑपरेशन जिला अस्पताल में किया गया था. महिला का कहना है कि अस्पताल कर्मियों ने ऑपरेशन के लिए उससे 25 हजार रुपए की मांग की थी. जब उसने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पैसे देने में असमर्थता जताई तो इलाज से मना कर दिया गया.

महिला ने इसके बाद जिलाधिकारी से शिकायत की. आरोप है कि डीएम के निर्देश पर इलाज मुफ्त करने के आदेश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल कर्मियों ने 8 हजार रुपए लेकर ऑपरेशन किया और बाकी रकम बाद में देने की बात कही.

चेकअप के दौरान जबरन घुटना मोड़ने का आरोप
रेशमा का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल की ओर से उसे कुछ दिनों बाद बेटी को दोबारा जांच के लिए लाने को कहा गया था. बताया गया था कि ऐसा नहीं करने पर उसका घुटना ठीक से नहीं मुड़ेगा. महिला के अनुसार जब वह बेटी को लेकर अस्पताल पहुंची तो ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ने जांच के दौरान उसकी बेटी का घुटना जबरन मोड़ दिया. इस दौरान बच्ची दर्द से चिल्लाने लगी और पैर से हड्डी टूटने जैसी आवाज आई. महिला का आरोप है कि बेटी की हालत बिगड़ने के बावजूद डॉक्टरों ने उसकी बात नहीं सुनी और उसे वहां से भेज दिया.

एक्स-रे में टूटी मिली हड्डी, कार्रवाई की मांग
पीड़ित मां का कहना है कि उसने अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. बाद में जब बेटी का एक्स-रे कराया गया तो उसमें हड्डी टूटने की बात सामने आई. इसके बाद महिला ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

जांच के बाद होगी कार्रवाई: सीएमओ
मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का कहना है कि अभी केवल एक पक्ष की बात सामने आई है. दूसरे पक्ष का बयान लेने और पूरे मामले की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

-संदीप सैनी की रिपोर्ट

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