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ब्रह्मोस से लेकर ड्रोन तक... डिफेंस में आत्मनिर्भर बनने की कोशिशों को रफ्तार दे रहा यूपी का डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

रक्षा उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता में उत्तर प्रदेश अहम भूमिका निभा रहा है. उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) ग्लोबल लेवल पर एक बड़े डिफेंस हब के तौर पर उभरा है. यह कॉरिडोर लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट जैसे 6 जगहों में फैला हुआ है.

CM Yogi with Brahmos (Photo/PTI File)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

भारत लगातार रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाता जा रहा है. इसमें उत्तर प्रदेश अहम रोल निभा रहा है. देश के बदलते एयरोस्पेस और डिफेंस इकोसिस्टम में उत्तर प्रदेश एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है. सूबे में बदलाव के केंद्र में एक महत्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) है. इस योजना का ऐलान साल 2018-19 के केंद्रीय बजट में किया गया था.

क्या है UPDIC का मकसद?
महत्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का मकसद स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इस कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) लागू कर रही है. 

6 जिलों में फैला है ये कॉरिडोर-
यह कॉरिडोर लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट जैसे 6 जगहों में फैला हुआ है. इसका लक्ष्य केवल रक्षा कंपनियों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निर्माण, अनुसंधान, परीक्षण, नवाचार और कौशल विकास को शामिल करना है और एक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है. यह भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन और भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य से पूरी तरह मेल खाता है.

अब तक 35 हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव-
पिछले कुछ सालों में जमीन पर भी काम की रफ्तार में तेजी आई है. UPEIDA के मुताबिक, इस कॉरिडोर को अब तक ₹35,000 करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. इसके साथ ही नई परियोजनाओं की घोषणा के साथ यह निवेश लगातार भी बढ़ रहा है.

ब्रह्मोस निर्माण की फैक्ट्री सबसे बड़ी परियोजना-
लखनऊ में स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस की निर्माण फैक्ट्री इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है. इस कॉरिडोर में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस जैसी बड़ी सरकारी और निजी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम कर रहे कई MSME भी मौजूद हैं.

अलीगढ़ में ड्रोन बनाने का काम शुरू-
हर नोड अपनी मौजूदा औद्योगिक ताकत और नए निवेश के ज़रिए इस कॉरिडोर के बड़े विजन में योगदान दे रहा है. कानपुर, अपने स्थापित इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की वजह से, कॉरिडोर के सबसे बड़े निवेश आकर्षित कर चुका है. झांसी में जल्द शुरू होने वाली भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की मिसाइल यूनिट है, जबकि लखनऊ में एडवांस्ड एयरोस्पेस और मिसाइल से जुड़े निर्माण में लगातार निवेश हो रहा है. अलीगढ़ में कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और ड्रोन बनाना शुरू कर दिया है. 

कॉरिडोर की कनेक्टिविटी शानदार-
कनेक्टिविटी भी इस कॉरिडोर की एक बड़ी खासियत बनकर उभरी है. 6 नोड्स को यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आने वाले गंगा एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जोड़ा गया है. यह लॉजिस्टिक्स नेटवर्क कच्चे माल, पुर्जों और तैयार उत्पादों की तेज आवाजाही को संभव बनाता है, जिससे उत्तर प्रदेश उन रक्षा निर्माताओं के लिए एक आकर्षक ठिकाना बन गया है जो अपना कारोबार शुरू करना या बढ़ाना चाहते हैं.

कई परियोजनाएं अब चालू हो चुकी हैं और कई और विकास के दौर में हैं, ऐसे में यह कॉरिडोर धीरे-धीरे भारत के एक प्रमुख रक्षा निर्माण इकोसिस्टम के रूप में आकार ले रहा है.

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