क्या है फुलप्रूफ लाइटनिंग वार्निंग सिस्टम, जिसे योगी आदित्यनाथ ने यूपी में लागू करने के दिए हैं आदेश

भारत में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली आकस्मिक मौतों में वज्रपात एक अहम कारण है. ऐसे में योगी सरकार इसे कम करने के लिए ऐसा सिस्टम लेकर आ रही है जो किसी क्षेत्र में वज्रपात की जानकारी पहले ही दे देगा. इससे उस क्षेत्र में मौजूद लोग खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

वज्रपात
अपूर्वा राय
  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST
  • वज्रपात सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा है.
  • इस सिस्टम के जरिए समय रहते आकाशीय बिजली का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली मौतों और नुकसान को रोकने के लिए उत्तरप्रदेश में फुलप्रूफ और एंड-टू-एंड अर्ली अलर्ट सिस्टम लागू करने का आदेश दिया है. उन्होंने अधिकारियों को इसे लागू करने में सरकारी एजेंसियों की मदद लेने को भी कहा है. योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में भारतीय मौसम विभाग, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ निरंतर संचार बनाए रखने का निर्देश दिया है. सीएम ने अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को अनुग्रह सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है.

भारत में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली आकस्मिक मौतों में वज्रपात एक अहम कारण है. इसे कम करने के लिए राज्य सरकार केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक ऐसी प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत मौसम केंद्र वज्रपात की तात्कालिक चेतावनी जारी कर पाएगा. वज्रपात से बचाव के लिए हर वैसी इमारतों पर तड़ित लगाना चाहिए जो तीन मंजिले या उससे ऊपर के हों

फुलप्रूफ लाइटनिंग वार्निंग सिस्टम क्या है

इस सिस्टम के जरिए समय रहते आकाशीय बिजली का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है और लोगों को अलर्ट किया जा सकता है. इसके लिए दामिनी ऐप विकसित किया जा रहा है. जोकि उपयोगकर्ताओं को सीधे एसएमएस और ईमेल के जरिए बिजली की चेतावनी भेज सकेगा. इसके साथ ही ग्रामीण इलाके के लोगों को आकाशीय बिजली से बचने के लिए वीडियो क्लिप, ऑडियो और एसएमएस के जरिए जागरुक भी किया जा रहा है. अभी चार से पांच दिन पहले बादल के हिसाब से वज्रपात की पूर्व सूचना दी जाती है.

वज्रपात कब होता है

आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से विपरीत दिशा में जाते हुए जब टकराते हैं, तो इससे घर्षण होता है और बिजली पैदा होती है, अब चूंकि आसमान में कोई कंडक्टर नहीं होता है, इसलिए यही बिजली जमीन पर गिर जाती है. जुलाई और अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है. इस दौरान वज्रपात की संभावना बढ़ जाती है. पानी के स्त्रोत के आस पास वज्रपात होने का खतरा अधिक होता है.

मौसम खराब होने पर क्या न करें

  • बिजली के खंभे के पास न खड़ें हों

  • बिजली उपकरणों, टेलीफोन, मोबाइल का प्रयोग न करें

  • पेड़ के नीचे न खड़े हों

  • समूह में न खड़े हों, बल्कि दूर-दूर खड़े हों

  • बिजली या टेलीफोन के तार के पास न खड़े हों.

 

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