बचपन की दिवाली याद कीजिए: छत पर चकरी घूमती थी, अनार की रोशनी में सबके चेहरे चमकते थे और मम्मी पीछे से चिल्लाती थीं, 'दूर हटकर जलाओ... ' वो रात जादू जैसी लगती थी. लेकिन अगली सुबह खिड़की खोलते ही धुंध की मोटी परत, खांसते बुजुर्ग और आंखें मलते बच्चे हमें हकीकत में लौटा देते हैं. त्योहार की खुशी और सांसों की फिक्र के बीच फंसे हम सब चाहते हैं कि परंपरा भी बची रहे और हवा भी. शायद ग्रीन पटाखे इसी उलझन का एक रास्ता हैं.
पिछले कुछ सालों से ग्रीन पटाखों की चर्चा बढ़ी है. इन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना जाता है. लेकिन बाजार में मिलने वाला हर वह पटाखा ग्रीन नहीं होता, जिसके डिब्बे पर इको-फ्रेंडली या ग्रीन लिखा हो. असली ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए खास लोगो और QR कोड जरूरी हैं. तो आइए जानते हैं कि ग्रीन पटाखे क्या होते हैं, ये कितना प्रदूषण कम करते हैं और दिवाली पर इन्हें खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, सामान्य पटाखों से कैसे अलग?
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं, जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के लिए तैयार किया गया है. इन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशाला नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने विकसित किया है. इन पटाखों को बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और रासायनिक मिश्रण में बदलाव किया जाता है. इनमें कुछ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम किया जाता है या उन्हें दूसरे पदार्थों से बदला जाता है. साथ ही, राख और धूल पैदा करने वाली सामग्री भी कम रखी जाती है.
सामान्य पटाखों के जलने से हवा में PM2.5, PM10, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक निकलते हैं. ग्रीन पटाखों में इन उत्सर्जनों को कम करने की कोशिश की जाती है. इनका मतलब यह नहीं है कि ये पूरी तरह प्रदूषण रहित हैं.
ग्रीन पटाखों से कितना कम होता है प्रदूषण?
CSIR-NEERI के मानकों के मुताबिक, ग्रीन पटाखों को सामान्य पटाखों की तुलना में कम से कम 30% पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन घटाने के लिए तैयार किया जाता है. कुछ निर्धारित श्रेणियों में 20% तक PM और कम से कम 10% गैसीय उत्सर्जन घटाने का मानक भी है.
CSIR की ओर से दिसंबर 2025 में जारी जानकारी के मुताबिक, ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर में करीब 30-40% तक कमी आ सकती है. इसका मतलब है कि अगर सामान्य पटाखे जलने से एक निश्चित मात्रा में प्रदूषक कण निकलते हैं, तो प्रमाणित ग्रीन पटाखों से उनकी मात्रा कम हो सकती है. हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि दिवाली पर प्रदूषण भी कुल मिलाकर 30-40% कम हो जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हवा की गुणवत्ता पर वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, पराली का धुआं और मौसम की स्थिति जैसे कई कारण असर डालते हैं.
तीन तरह के होते हैं ग्रीन पटाखे
SWAS (Safe Water Releaser): इन पटाखों में पानी छोड़ने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसका उद्देश्य हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को कम करना है.
STAR (Safe Thermite Cracker): इस श्रेणी के पटाखों में थर्माइट की मात्रा कम रखी जाती है. इनका मकसद सामान्य पटाखों की तुलना में कम उत्सर्जन करना है.
SAFAL (Safe Minimal Aluminium): इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है, ताकि जलने के दौरान निकलने वाले प्रदूषक तत्वों को घटाया जा सके.
असली ग्रीन पटाखों की पहचान कैसे करें?
CSIR-NEERI का लोगो देखें: प्रमाणित ग्रीन पटाखों के पैकेट पर संस्थान का निर्धारित लोगो होना चाहिए.
QR कोड स्कैन करें: पैकेट पर दिया गया QR कोड स्कैन करके उत्पाद और निर्माता से जुड़ी जानकारी जांचें. दिल्ली-NCR के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हर डिब्बे पर उत्पाद के हिसाब से अलग QR कोड अनिवार्य किया है.
निर्माता का नाम देखें: पैकेट पर निर्माता का नाम और रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी साफ लिखी होनी चाहिए.
सीलबंद पैकेट खरीदें: खुले या पहले से टूटे हुए पैकेट न खरीदें. पैकेट पर छेड़छाड़ के निशान भी जांचें.
लाइसेंस की जानकारी देखें: पटाखे बेचने वाले दुकानदार के पास जरूरी लाइसेंस होना चाहिए.
दिवाली पर ग्रीन पटाखे खरीदते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान
अगर कोई दुकानदार सामान्य पटाखों को ग्रीन बताकर बेच रहा है, तो उससे प्रमाण और QR कोड दिखाने को कहें.
केवल प्रशासन की ओर से तय और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही पटाखे खरीदें.
खासकर ऐसे पटाखे न खरीदें, जिनमें प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल हो या जो नियमों के खिलाफ हों.
पटाखे जलाते समय बड़ों की निगरानी जरूरी है. पानी की बाल्टी पास रखें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें.
ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण फैलाते हैं. इसलिए कम से कम पटाखे जलाना ही बेहतर है.
दिल्ली-NCR में पटाखे जलाने को लेकर क्या हैं नियम?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है। पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक जलाए जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 15 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में पटाखे चलाने को लेकर आदेश दिया था. इसमें दो दिन 19 और 20 अक्टूबर को ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दी थी.
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