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क्या था जौहर प्रथा? जिसको लेकर स्वरा भास्कर के बयान पर मचा है विवाद, इतिहास के बड़े जौहर के बारे में जानें

जौहर प्रथा में स्त्रियां अपने सम्मान की रक्षा के लिए खुद को आग के हवाले करती थीं. इससे पहले स्त्रियां पूरा श्रृंगार करती थीं. बताया जाता है कि स्त्रियां ऐसा इसलिए करती थीं, क्योंकि उनको खुद को आक्रमणकारियों के हाथों में जाने का खतरा रहता था. इतिहास में कई जौहर का जिक्र है.

Jauhar Pratha (Photo/ChatGPT AI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:31 PM IST

बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर की जौहर पर दिए बयान की खूब चर्चा हो रही है. इसका खूब विरोध हो रहा है. सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर ट्रोल हो रही हैं. हालांकि स्वरा भास्कर ने इसपर सफाई भी दी है. उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा कि रानी पद्मावती कायर थीं या महल की बाकी महिलाएं कायर थीं. मैंने अपने बारे में बात की थी.

स्वरा भास्कर के विवादित बयान के बाद जौहर की चर्चा हो रही है. हर कोई जानना चाहता है कि जौहर क्या होता है? इसका इतिहास क्या है? चलिए आपको बताते हैं कि जौहर क्या होता है और इसे कौन करता था?

क्या है जौहर प्रथा?
जौहर प्रथा को मुख्य तौर पर राजपुताना आन-बान से जोड़ा गया है. इस प्रथा में स्त्रियां किसी कुंड या चिता सजाकर खुद को आग के हवाले कर देती थीं. स्त्रियों के आत्मदाह को जौहर कहा जाता था.

स्त्रियां क्यों करती थीं जौहर?
बताया जाता है कि राजपूत स्त्रियां जौहर इसलिए करती थीं, क्योंकि उनको आक्रमणकारियों के हाथों में जाने का खतरा रहता था. जौहर तब किया जाता था, जब राजा को युद्ध में हार मिलती थी और आक्रमणकारियों के किले पर कब्जे का खतरा रहता था. ऐसे में राजपूत स्त्रियां जौहर करती थीं. स्त्रियां खुद के सम्मान को जिंदगी से ऊपर रखती थीं. इसलिए वो खुद को आक्रमणकारियों के हाथ नहीं आने देना चाहती थी. इसलिए वो खुद को अग्नि के हवाले कर देती थीं. जौहर से पहले स्त्रियां श्रृंगार करती थीं, उसके बाद आग में कूद जाती थीं. जौहर स्त्रियां सामूहिक तौर पर करती थीं.

जौहर शब्द का क्या है मतलब?
जौहर शब्द फारसी शब्द है. किताब 'सती, द ब्लेसिंग एंड द कर्स' में लेख जॉन एस. हैवले बताते हैं कि जौहर शब्द जिवहर का अनुवाद है. इसका मतलब जवाहरात, आभूषण होता है.

कब-कब हुए बड़े जौहर?
भारत के इतिहास में कई बड़े जौहर हुए हैं. किताबों में इसका जिक्र मिलता है. बृजेंद्र कुमार सिंहल की किताब 'रानी पद्मनी: चित्तौड़ का प्रथम जौहर' में जौहर का जिक्र है. चलिए आपको कुछ बड़े जौहर के बारे बताते हैं.

साल 1303 में जौहर का जिक्र-
चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय जौहर हुआ था. इसमें महारानी पद्मिनी ने हजारों राजपूत स्त्रियों के साथ जौहर कुंड में आत्मदाह किया था. इस जौहर की चर्चा हमेशा होती है.

साल 1535 में जौहर-
गुजरात के शासक बहादुर शाह ने साल 1535 में चित्तौड़ पर हमला किया था. उस समय रानी कर्णावती का शासन था. जब चित्तौड़ की हार तय हो गई तो रानी कर्णावती की अगुवाई में महिलाओं ने जौहर किया था.

साल 1568 का जौहर-
साल 1568 में जब अकबर ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था तो जौहर हुआ था. सैकड़ों राजपूत स्त्रियों ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर किया था. इस जौहर का जिक्र आईन-ए-अकबरी में भी है.

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