उत्तर भारत का दिल्ली-एनसीआर हो या यूपी-बिहार या कोई और राज्य इस समय भीषण ठंड की चपेट में हैं. हाड़ कंपा देने वाली ठंड, कोहरे और शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. कई जगहों धूप के लिए लोग तरस रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक अभी कड़ाके की ठंड से उत्तर भारत के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. कई मैदानी इलाकों का तापमान हिल स्टेशनों से भी नीचे चला गया है. ऐसा रेडिएशन कूलिंग की वजह से हुआ है. आइए जानते हैं आखिर क्या होती है रेडिएशन कूलिंग और इसका ठंड से क्या संबंध है?
क्या होती है रेडिएशन कूलिंग
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक रेडिएशन कूलिंग (Radiation Cooling) एक मौसम विज्ञान से जुड़ी प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया में पृथ्वी (Earth) रात के समय अपनी सतह में संचित गर्मी को तेजी से विकिरण यानी रेडिएशन के रूप में अंतरिक्ष (Space) में छोड़ती है. आसमान साफ होने, कम हवा होने और कम नमी होने पर यह प्रक्रिया और तेज होती है. इसके कारण जमीन और उसके आसपास की हवा का तापमान तेजी से गिरता है. तापमान नीचे गिरने से लोगों को अधिक सर्दी महसूस होती है. इस प्रक्रिया को रेडिएशन कूलिंग कहते हैं. मैदानी क्षेत्रों में रेडिएशन कूलिंग अधिक होता है. इसके कारण यहां कड़ाके की सर्दी पड़ती है. कई बार तो हिल स्टेशन का तापमान सामान्य रहता है तो वहीं मैदानी क्षेत्रों में तापमान काफी नीचे चला जाता है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति रेडिएशन कूलिंग के चलते ही आती है. रेडिएशन कूलिंग में दिन की अपेक्षा रातें सामान्य से अधिक ठंडी रहती हैं.
...तो इसलिए पड़ती है अधिक सर्दी
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक सर्दी के मौसम में मैदानी क्षेत्रों में रेडिएशन कूलिंग की स्थिति देखने को मिलती है. यह स्थिति रात के समय बनती है. इस दौरान मैदानी क्षेत्रों में दिन की गर्मी स्पेस में चली जाती है. इससे धरती का तापमान तेजी से गिरने लगता है. इससे सर्दी बढ़ जाती है. उधर, पहाड़ी क्षेत्रों में हवा का प्रवाह बना रहता है. इस कारण तापमान में तेजी से गिरावट नहीं आती है. मैदानी क्षेत्रों में धुंध, नमी और इन्वर्जन जैसी स्थितियां कोल्ड वेब को बढ़ा देती हैं. इस कारण ही कई बार शिमला-मंसूरी से भी कम तापमान मैदानी क्षेत्रों में दर्ज किया जाता है.
पहाड़ों में धूप निकलने के कारण बढ़ता है तापमान
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्र में प्रदूषण कम होने और तेज हवाएं चलने के कारण धूप निकल जाती है. इसके चलते यहां दिन का तापमान बढ़ जाता है. मैदानी इलाकों में कोहरा, धीमी हवा और नमी होने के कारण धूप नहीं निकलती है. इसके कारण तापमान गिर जाता है. इसी कारण मैदान क्षेत्र दिन में अधिक ठंडे रहते हैं और पहाड़ी क्षेत्र में ठंड कम हो जाती है.
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभवाना
पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम बदलता है. मौसम विभाग के मुताबिक 9 जनवरी से एक बार फिर मौसम के करवट लेने की संभावना है क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ेगा. इस पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 9 जनवरी के बाद से 11 जनवरी तक उत्तर भारत के मौसम के मिजाज में बदलाव देखने को मिल सकता है.