अगर आप भी यह सोचते हैं कि एक दिन देश के नेशनल हाईवे से टोल टैक्स खत्म हो जाएगा, तो सरकार ने इस पर अपनी स्थिति साफ कर दी है. संसद में दिए गए जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्गों से टोल टैक्स हटाने या टोल प्लाजा बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार का कहना है कि टोल से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल हाईवे के रखरखाव, चौड़ीकरण और नई सड़क परियोजनाओं के निर्माण में किया जाता है.
टोल टैक्स खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं
संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि देश में नेशनल हाईवे पर टोल वसूली जारी रहेगी. सरकार ने स्पष्ट किया कि टोल प्लाजा हटाने या टोल टैक्स बंद करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत बने हाईवे पर रियायत अवधि तक संबंधित कंपनी टोल वसूलती है. इसके बाद सड़क सरकार या अधिकृत एजेंसी को सौंप दी जाती है, लेकिन नियमों के अनुसार टोल वसूली जारी रहती है. वहीं, सरकारी फंड से बने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी टोल लिया जाता है.
व्हीकल टैक्स और टोल टैक्स में क्या अंतर है?
सरकार ने बताया कि व्हीकल टैक्स और टोल टैक्स दोनों अलग-अलग तरह के शुल्क हैं. वाहन कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संविधान के प्रावधानों के तहत लगाया जाता है. वहीं वाहन पंजीकरण शुल्क केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अनुसार तय किया जाता है. इसके विपरीत टोल टैक्स राष्ट्रीय राजमार्ग का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों से यूजर फीस के रूप में लिया जाता है.
कहां खर्च होता है टोल का पैसा?
सरकार के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के तहत टोल वसूला जाता है. इससे मिलने वाली राशि भारत की संचित निधि में जमा होती है. बाद में बजटीय आवंटन के जरिए इस धन का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, मरम्मत, चौड़ीकरण, विकास और नई सड़क परियोजनाओं के निर्माण में किया जाता है. सरकार का कहना है कि बेहतर और सुरक्षित सड़क नेटवर्क बनाए रखने के लिए टोल व्यवस्था जरूरी है. इसलिए मौजूदा नियमों के तहत देशभर में टोल प्लाजा संचालित होते रहेंगे और टोल टैक्स की वसूली जारी रहेगी.
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