चुनाव आयोग के निर्देश पर इस समय देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का कार्य जोर-शोर से किया जा रहा है. इलेक्शन कमीशन ने हर बूथ के BLO (बीएलओ) यानी बूथ लेवल ऑफिसर को इस कार्य में लगाया है. बीएलओ हर मतदाता के घर दस्तक दे रहे हैं.
BLO इस समय सिर्फ अपनी काम को लेकर ही चर्चा में नहीं बल्कि कहीं काम के दबाव में खुदकुशी को लेकर तो कहीं नौकरी छोड़ने पर इनकी चर्चा हो रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सही में बूथ लेवल ऑफिसर का काम बेहद मुश्किल है? आइए जानते हैं आखिर कौन बनता है बीएलओ, कितनी मिलती है सैलरी और इनका कार्य क्या होता है? इन सवालों को जानने से पहले SIR के बारे में जान लेते हैं.
क्या है SIR
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक प्रक्रिया है. चुनाव आयोग इसके जरिए मतदाता सूची को अपडेट करता है. आपको मालूम हो कि कई बार किसी मतदाता का निधन हो चुका होता है लेकिन उसका नाम वोटल लिस्ट में दर्ज रहता है. कई बार किसी व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष यानी वोट देने लायक हो जाती है लेकिन उसका नाम वोटर लिस्ट में होता ही नहीं है. ऐसी स्थिति में एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए या ऐड किए जाते हैं.
कौन बनता है BLO और क्या होता है इनका काम
बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ के लिए कोई अलग से बहाली नहीं होती है बल्कि BLO की जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी/लेखपाल/अमीन, पंचायत सचिव/ग्राम सेवक, बिजली बिल रीडर, पोस्टमैन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता (MPW/ANM आदि) को ही दी जाती है. अभी एसआईआर के जरिए फर्जी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट हटाने और सही मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम किया जा रहा है. इस कार्य में बीएलओ को लगाया गया है. एक तरह से बीएलओ सबसे निचले स्तर का चुनाव अधिकारी होता है.
बीएलओ आपका वोटर आईडी कार्ड बनाने का काम करता है. हर बीएलओ के पास एक बूथ की जिम्मेदारी होती है. उस बूथ पर जितने भी लोग वोट डालने आएंगे, उनके सत्यापन से लेकर उनके वोटर आईडी कार्ड की जिम्मेदारी बीएलओ के पास होती है. बीएलओ हर घर में जाकर यह सुनिश्चित करता है कि उस घर में मौजूद कोई ऐसा 18 साल या उससे ऊपर का सदस्य तो नहीं है, जिसके पास वोटर कार्ड नहीं है. बीएलओ की ही जिम्मेदारी होती है कि यदि कोई पलायन कर चुका है या किसी की मौत हो चुकी है तो ऐसे लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाए. इतना ही नहीं फर्जी वोटों को रोकना या फिर इनकी शिकायत करना भी बीएलओ की जिम्मेदारी होती है.
क्यों तनाव में हैं बीएलओ
आपको मालूम हो कि BLO के लिए कोई अलग से तो बहाली होती नहीं है. BLO पहले से ही अपनी नौकरी कर रहे होते हैं, उन्हें इस नौकरी के साथ बीएलओ के जो काम हैं, उसे पूरे करने होते हैं. ऐसे में बीएलओ को दोगुने काम करने होते हैं. कई बार काम का ज्यादा बोझ हो जाने के कारण वे तनाव में आ जाते हैं. एसआईआर का काम पूरा करने के लिए एक डेडलाइन दे दी गई है. इस कारण से भी बीएलओ मानसिक तनाव में हैं. कुछ मीडिया वालों ने काम के अधिक दबाव के चलते कुछ बीएलओ के जान देने की खबरें भी दी हैं. तृणमूल कांग्रेस ने सिर्फ बंगाल में ही 34 लोगों की मौत का दावा किया है. इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग ने जिला और राज्यों से रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने साफ कहा है कि अभी तक किसी ने भी काम के दबाव के चलते जान नहीं दी है.
बीएलओ को कितनी मिलती है सैलरी
आपको मालूम हो कि SIR का काम BLO को उनकी मुख्य सरकारी नौकरी के अतिरिक्त सौंपा गया है. यही कारण है कि बीएलओ को इस काम के लिए वेतन नहीं मानदेय दिया जाता है. कर्मचारियों को इसके लिए वार्षिक मानदेय दिए जाते हैं. बीएलओ का मानदेय राज्यों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. आम तौर पर मानदेय 12 हजार रुपए दिए जाते हैं. पहले मानदेय 6 हजार रुपए था, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है. एक्स्ट्रा काम जैसे कि SIR के लिए उन्हें अलग से प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जो दो से 6 हजार तक हो सकती है.